भारतीय वायु सेना के एचएएल तेजस एमके-1 लड़ाकू विमान के दुबई एयर शो में दुर्घटनाग्रस्त होने की जांच अभी जारी है। भारतीय वायु सेना के उप प्रमुख एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
जोधपुर में बोलते हुए एयर मार्शल दीक्षित ने कहा कि तकनीकी विश्लेषण के अंतिम चरण के लिए कुछ और घटक जुटाए जा रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि तकनीकी परीक्षण पूरा होने के बाद ही दुर्घटना के कारण का पता चल सकेगा।
उन्होंने एएनआई के हवाले से कहा, “दुबई दुर्घटना की जांच अभी चल रही है। कुछ घटक हैं जिन्हें हम अंतिम तकनीकी विश्लेषण के लिए प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। फिर हम इस प्रश्न का उत्तर दे पाएंगे।”
तेजस लड़ाकू विमान 21 नवंबर 2025 को दुबई एयर शो में उड़ान प्रदर्शन के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में विमान उड़ा रहे विंग कमांडर नमांश स्याल की मृत्यु हो गई थी।
दुर्घटना के बाद भारतीय वायु सेना ने हादसे की परिस्थितियों और कारणों का पता लगाने के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी गठित की थी। वायु सेना ने दिवंगत पायलट के परिवार के प्रति संवेदना भी व्यक्त की थी।
दीक्षित की ताजा टिप्पणी से साफ है कि तकनीकी जांच अभी अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंची है। अतिरिक्त घटकों को विश्लेषण के लिए जुटाने की प्रक्रिया यह दिखाती है कि जांचकर्ता उपलब्ध साक्ष्यों की आगे भी पड़ताल कर रहे हैं।
यह जांच भारतीय वायु सेना के साथ-साथ भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि तेजस एमके-1 वायु सेना के लड़ाकू बेड़े का हिस्सा है। हालांकि उपलब्ध सामग्री में किसी प्रारंभिक निष्कर्ष का उल्लेख नहीं है और न ही दुर्घटना के लिए किसी विशिष्ट तकनीकी, मानवीय या परिचालन कारण की पहचान की गई है।
इसलिए एयर मार्शल दीक्षित की टिप्पणी से नवंबर 2025 की दुर्घटना का कारण अभी अनिश्चित बना हुआ है। हादसे की परिस्थितियों पर किसी निष्कर्ष के लिए चल रही जांच और तकनीकी विश्लेषण के नतीजों का इंतजार करना होगा।
दुुबई एयर शो में यह दुर्घटना सार्वजनिक उड़ान प्रदर्शन के दौरान हुई थी, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय विमानन मंच पर सामने आई एक गंभीर घटना बन गई। इस हादसे में भारतीय वायु सेना के एक पायलट की जान गई और कारण जानने के लिए औपचारिक जांच प्रक्रिया शुरू की गई।
सितंबर 2026 तक अतिरिक्त घटक अभी भी जांच के लिए जुटाए जा रहे हैं, इसलिए जांच जारी है। कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी और संबद्ध तकनीकी विश्लेषण के अंतिम निष्कर्ष आने के बाद ही दुर्घटना का निश्चित कारण तय हो सकेगा।