उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त), पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वीएसएम ने लोक भवन में शिष्टाचार भेंट के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वाईएसएम, जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, केंद्रीय कमान, से मुलाकात की।
इस मुलाकात में दोनों वरिष्ठ सैन्य नेताओं को रणनीतिक महत्व से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श का अवसर मिला। विशेष रूप से उत्तराखंड की राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा हुई। राज्य की लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और हिमालयी क्षेत्र में उसके महत्व को देखते हुए, सुरक्षा वातावरण में हो रहे बदलाव और मजबूत रक्षा तैयारियों की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
दोनों नेताओं ने बदलते राष्ट्रीय सुरक्षा परिदृश्य, उभरती रणनीतिक चुनौतियों और समग्र सुरक्षा तथा मजबूती बढ़ाने के लिए नागरिक प्रशासन और सशस्त्र बलों के बीच निरंतर समन्वय की आवश्यकता पर भी चर्चा की।
चर्चा का एक प्रमुख विषय पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों का कल्याण रहा। दोनों नेताओं ने कल्याणकारी पहलों, सेवाओं तक बेहतर पहुंच और राष्ट्र के लिए उनके अमूल्य योगदान की निरंतर मान्यता के माध्यम से पूर्व सैनिकों को व्यापक सहायता सुनिश्चित करने के महत्व को दोहराया।
उन्होंने पूर्व सैनिक समुदाय के जीवन स्तर और कल्याण को बेहतर बनाने के लिए उपायों को मजबूत करने की जरूरत पर भी बात की। इस संवाद को राष्ट्रीय हितों की रक्षा और पूर्व सैनिकों की चिंताओं को प्राथमिकता देने की साझा प्रतिबद्धता के रूप में देखा गया।
उत्तराखंड में देश के सबसे अधिक सेवारत और सेवानिवृत्त सशस्त्र बल कर्मियों का प्रतिनिधित्व है। इसी कारण राज्य भारत की सैन्य परंपरा और रक्षा तैयारियों में लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यह शिष्टाचार भेंट राज्य प्रशासन और सशस्त्र बलों के बीच घनिष्ठ संबंध को भी रेखांकित करती है। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, क्षेत्रीय विकास और पूर्व सैनिक कल्याण से जुड़े विषयों पर निरंतर सहयोग के महत्व को सामने रखा गया।
बैठक ने भारत की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने तथा सैन्य कर्मियों और पूर्व सैनिकों की सेवा और बलिदान का सम्मान करने के सामूहिक संकल्प की भी पुष्टि की।