अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच के करीब 18,300 अग्निवीर चार साल का कार्यकाल पूरा कर 31 दिसंबर 2026 तक सशस्त्र बलों से विदा होंगे। मामले से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, इनकी चरणबद्ध विदाई नवंबर के मध्य से शुरू होगी। सबसे पहले नौसेना में यह प्रक्रिया शुरू होगी, जिसके बाद वायुसेना और थलसेना की बारी आएगी।
पहले बैच में तीनों सेनाओं ने लगभग 24,400 अग्निवीर भर्ती किए थे। इनमें करीब 19,000 थलसेना, 2,850 वायुसेना और 2,550 नौसेना में शामिल हुए थे। इनमें से 75 प्रतिशत का चार साल का अनुबंध समाप्त होने पर सेवा से बाहर होना तय है। अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को चिकित्सा फिटनेस, संबंधित सेना की जरूरतों और व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर नियमित संवर्ग में अगले 15 साल के लिए रखा जा सकता है।
वायुसेना ने पहले बैच के 2,850 अग्निवीर वायु में से 712 को नियमित सेवा के लिए चुन लिया है। यह संख्या मौजूदा 25 प्रतिशत की सीमा के अनुरूप है। जिनका चयन नहीं हुआ है, उन्हें इसकी जानकारी दे दी गई है।
तीनों सेनाओं ने अभियान संबंधी क्षमता, हथियार चलाने में दक्षता, शारीरिक फिटनेस और सैनिक कौशल सहित विभिन्न भूमिकाओं में अग्निवीरों के प्रदर्शन पर संतोष जताया है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि भविष्य में विशेष कौशल वाले अधिक अग्निवीरों को सेवा में बनाए रखने के लिए योजना में बदलाव हो सकता है। हालांकि, अभी कोई औपचारिक संशोधन अधिसूचित नहीं हुआ है। सेनाओं की सिफारिशें विचार के लिए सैन्य कार्य विभाग को भेजी गई हैं।
सेवा निधि और अन्य लाभ
चार साल बाद सेवा छोड़ने वाले अग्निवीरों को 11.71 लाख रुपये का कर-मुक्त सेवा निधि पैकेज मिलेगा। इसमें सेवाकाल के दौरान उनके वेतन से जमा हुए लगभग 5.02 लाख रुपये, सरकार का उतना ही योगदान और उस पर अर्जित ब्याज शामिल है।
इन अग्निवीरों को पेंशन या ग्रेच्युटी नहीं मिलेगी। इसके विपरीत, पुरानी भर्ती व्यवस्था के तहत आए जवान आम तौर पर लगभग 20 साल सेवा करते हैं और करीब 38–39 वर्ष की उम्र में पूर्ण सेवानिवृत्ति लाभों के साथ रिटायर होते हैं। अग्निवीरों को सेवाकाल के दौरान बिना अंशदान वाला 48 लाख रुपये का जीवन बीमा कवर मिलता है। सैन्य सेवा से संबंधित कारणों से मृत्यु होने पर 44 लाख रुपये की अतिरिक्त अनुग्रह राशि का भी प्रावधान है।
योजना के तहत वार्षिक पारिश्रमिक पहले साल 4.76 लाख रुपये से शुरू होकर चौथे साल 6.92 लाख रुपये तक पहुंचता है। पैकेज का 30 प्रतिशत हिस्सा सेवा निधि कोष में जमा किया जाता है।
सेवा के बाद रोजगार के विकल्प
सेवा से बाहर आने वाले अग्निवीरों की उम्र लगभग साढ़े 21 से 25 साल होगी। उनके लिए गृह मंत्रालय ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों—बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ और आईटीबीपी—तथा असम राइफल्स में कांस्टेबल जनरल ड्यूटी और राइफलमैन पदों की 50 प्रतिशत रिक्तियां आरक्षित की हैं। पूर्व अग्निवीरों को लिखित परीक्षा, शारीरिक मानक परीक्षण और शारीरिक दक्षता परीक्षा से छूट दी गई है।
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल इनके लिए आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था संबंधी जिम्मेदारियों पर केंद्रित विशेष प्रशिक्षण तैयार कर रहे हैं। इसकी जरूरत इसलिए है क्योंकि अग्निवीरों का सैन्य प्रशिक्षण मुख्य रूप से युद्धक भूमिकाओं पर केंद्रित होता है।
पूर्व अग्निवीर राज्य पुलिस बलों, भारतीय रेलवे, तटरक्षक बल और रक्षा क्षेत्र के 16 सार्वजनिक उपक्रमों में भी रोजगार आरक्षण के पात्र हैं। हरियाणा और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों ने उन्हें भर्ती करने की तैयारी जताई है। कुछ राज्यों ने शुरुआती स्तर के पदों पर 10 से 20 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की है।
चंडीगढ़ ने जेल वार्डर जैसे कुछ समूह ‘ग’ पदों पर पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण मंजूर किया है। सेवा के दौरान मिले वीरता पुरस्कार भी चयन प्रक्रियाओं में अतिरिक्त लाभ देते हैं।
जून 2022 में घोषित हुई थी योजना
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जून 2022 में अग्निपथ योजना की घोषणा की थी। इसने अधिकारी रैंक से नीचे के सैन्यकर्मियों की दशकों पुरानी भर्ती व्यवस्था की जगह ली। योजना के घोषित उद्देश्य सेनाओं को युवा और युद्ध के लिए तैयार रखना तथा लंबे समय के पेंशन खर्च को कम करना थे।
शुरुआत में भर्ती की आयु सीमा साढ़े 17 से 21 साल रखी गई थी, जिसमें बाद में बदलाव किया गया। अग्निवीरों का चार साल का कार्यकाल प्रशिक्षण सहित होता है। पहले बैचों का प्रशिक्षण 2022 के अंत में शुरू हुआ था। नौसेना के पहले बैच ने नवंबर 2022 में रिपोर्ट किया था।
कम सेवाकाल और पारंपरिक पेंशन लाभ नहीं मिलने के कारण यह योजना बहस का विषय रही है। वहीं, सेनाओं ने ऑपरेशन सिंदूर में अग्निवीरों के प्रदर्शन को उनके साहस और कठिन परिस्थितियों में डटे रहने की क्षमता के उदाहरण के रूप में पेश किया है।
इस समय थलसेना में लगभग 2.70 लाख, वायुसेना में 27,000 और नौसेना में 21,000 अग्निवीर हैं। पहले बड़े बैच के नागरिक जीवन और नए रोजगार की ओर बढ़ने के साथ पुनर्वास व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता की भी परीक्षा होगी। रक्षा मंत्रालय नियमित सेवा में बनाए रखने के मानदंडों में संभावित बदलाव के लिए उनके प्रदर्शन से जुड़े आंकड़ों की समीक्षा कर रहा है।