त्रिपुरा के 33 वर्षीय सीमा सुरक्षा बल के जवान प्रेमजय सरकार का दिल्ली में ड्यूटी के दौरान कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार उनके पार्थिव शरीर को अगरतला लाया गया, जहां अंतिम विदाई से पहले उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
प्रेमजय सरकार, रबीन्द्र सरकार के पुत्र थे और पश्चिम त्रिपुरा की बामुटिया विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत रंगुटिया गांव के निवासी थे। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने 1 जून 2011 को बीएसएफ जॉइन की थी और वह 40वीं बटालियन में दिल्ली स्थित बीएसएफ मुख्यालय पर तैनात थे।
त्रिपुरा इन्फो की रिपोर्ट के अनुसार, 6 अक्टूबर 2026 को उनकी मृत्यु की खबर दी गई। बताया गया कि रविवार देर रात करीब मध्यरात्रि के आसपास ड्यूटी के दौरान शौचालय जाने के बाद वह अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। सहकर्मी उन्हें परिसर के भीतर बीएसएफ अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। रिपोर्ट में मृत्यु का कारण गंभीर कार्डियक अरेस्ट बताया गया है।
उसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उस रात उनकी छोटी बेटी प्रियंगशी का जन्मदिन था, जो अगरतला स्थित किराए के घर में मनाया जा रहा था। उन्होंने शाम को अपनी पत्नी और बेटियों से बात की थी और कहा था कि वह दुर्गा पूजा की छुट्टी पर घर आएंगे।
उनके परिवार में पत्नी माधवी दास और दो बेटियां हैं। दोनों ने 2016 में विवाह किया था। परिवार अगरतला में किराए के मकान में रहता है। त्रिपुरा टाइम्स की 7 अक्टूबर की एक बाद की रिपोर्ट में उनके माता-पिता, एक बड़े भाई और तीन बहनों को भी जीवित परिजनों में शामिल किया गया तथा बेटियों की उम्र चार से सात वर्ष के बीच बताई गई।
घटना के समय और विवरण को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में भिन्नता सामने आई। त्रिपुरा इन्फो के अनुसार उनका पार्थिव शरीर 6 अक्टूबर की सुबह अगरतला पहुंचा। वहीं अगले दिन प्रकाशित त्रिपुरा टाइम्स ने लिखा कि वह मंगलवार को बीमार पड़े, उन्हें अस्पताल ले जाया गया और मृत घोषित किया गया, जबकि पार्थिव शरीर बुधवार सुबह अगरतला हवाई अड्डे लाया गया।
उसी रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि स्थानीय युवाओं ने हवाई अड्डे से रंगुटिया तक स्वतःस्फूर्त बाइक रैली निकाली। बीएसएफ ने औपचारिकताएं पूरी करने के बाद गार्ड ऑफ ऑनर दिया। त्रिपुरा टाइम्स ने उनकी उम्र 36 वर्ष बताई और नाम प्रेमजय सरकार लिखा।
दोनों रिपोर्टों में बीएसएफ का कोई आधिकारिक बयान उपलब्ध नहीं था। रंगुटिया के निवासियों ने जवान की मृत्यु से गांव के स्तब्ध होने की बात कही और उनके लिए प्रार्थना की गई। बताया गया कि उन्होंने लगभग 15 वर्ष की सेवा पूरी कर ली थी।