पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और मालदा क्षेत्र तथा बांग्लादेश के चपैनवाबगंज में शनिवार शाम पद्मा नदी में तेज धारा के कारण नाव पलटने के बाद सीमा सुरक्षा बल ने दस बांग्लादेशी नागरिकों को बचा लिया। बचाए गए लोगों में कुछ हफ्ते का एक शिशु, तीन अन्य बच्चे, तीन महिलाएं और चार पुरुष शामिल थे। बाद में चिकित्सकीय सहायता और औपचारिकताओं के बाद उन्हें बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश को सौंप दिया गया।
यह घटना 12 सितंबर 2026 की शाम भारत-बांग्लादेश सीमा के पास हुई। बांग्लादेशी विवरण के अनुसार, लगभग 11 या 12 यात्रियों को लेकर एक छोटी नाव शाम करीब 5:00 से 5:30 बजे के बीच चपैनवाबगंज सदर उपजिला के बाखेराली या आलिमनगर घाट से नारायणपुर संघ के जहुरपुर की ओर रवाना हुई थी। लगभग 20 मिनट बाद तेज हवा और नदी की शक्तिशाली धारा ने नाव को पलट दिया।
मालदा सेक्टर के 71 बटालियन के सतर्क जवान, जो बॉर्डर आउट पोस्ट खांडुआ के पास तैनात थे, ने कई लोगों को धारा में संघर्ष करते और डूबने के खतरे में देखा। उन्होंने तुरंत स्पीडबोट से बचाव अभियान शुरू किया। लगातार प्रयासों के बाद सभी दस लोगों को बाहर निकाल लिया गया। कुछ भारतीय रिपोर्टों में तारणगर क्षेत्र, लालगोला, मुर्शिदाबाद जिले से भी स्पीडबोट भेजे जाने का उल्लेख किया गया।
बचाए गए लोगों में एक शिशु भी था, जिसकी उम्र सीमा सुरक्षा बल ने लगभग 30 दिन और बांग्लादेशी स्रोतों ने लगभग 20 दिन बताई। बच्चे की हालत गंभीर थी, इसलिए उसे तुरंत प्राथमिक उपचार दिया गया और निकटतम सरकारी अस्पताल ले जाया गया। बाद में शिशु की हालत स्थिर हो गई और उसे सामान्य बताया गया। बाकी बचे लोगों को भी चिकित्सकीय जांच और प्राथमिक उपचार मिला।
सीमा सुरक्षा बल ने समूह को बांग्लादेश के जहुरपुर गांव के निवासी बताया, जो चपई नवाबगंज से जहुरपुर जा रहे थे, तभी पद्मा, जिसे भारतीय पक्ष में गंगा कहा जाता है, पार करते समय उनकी नाव पलट गई। धारा उन्हें भारतीय जलक्षेत्र में बहा ले गई। बांग्लादेशी रिपोर्टों में बचाए गए दस लोगों के नाम रूसेल, इब्राहिम, सॉदागर, इब्राहिम, सखीना, नीलूफा, तानिया और उसका शिशु, सानाउल्लाह और आल अमीन बताए गए।
एक यात्री वसीम नाव से तैरकर बांग्लादेशी क्षेत्र में लौट गया। कुछ बांग्लादेशी रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि एक अन्य यात्री मुस्तफा लापता था, जबकि स्थानीय स्तर पर दूसरी जानकारी के अनुसार नाव पर सवार सभी लोगों का पता चल गया था। बांग्लादेशी पक्ष में खोजबीन की सूचना भी दी गई।
जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद सीमा सुरक्षा बल ने 12 सितंबर की रात लगभग 10:00 बजे फरिदपुर सीमा पर कंपनी कमांडर स्तर की झंडा बैठक के बाद दसों नागरिकों को 53 बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश बटालियन के जवानों को सौंप दिया। 53 बीजीबी बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल काजी मुस्तफिजुर रहमान ने हस्तांतरण की पुष्टि की। बाद में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में उन्हें परिजनों से मिलाया गया।
आधिकारिक बयान में सीमा सुरक्षा बल ने इस अभियान को त्वरित और साहसिक बताया। बल के अनुसार जवानों ने तेज नदी धारा में कई लोगों को डूबने के खतरे में देखा, स्पीडबोट से बचाव किया और बाद में समूह की सुरक्षित वापसी के लिए बीजीबी के समकक्षों के साथ समन्वय किया। यह घटना दोनों सीमा बलों के बीच नियमित मानवीय समन्वय को भी दर्शाती है, खासकर ऐसी नदी सीमा पर जहां अचानक मौसम और धारा छोटी नावों के लिए खतरा बन जाते हैं।
पश्चिम बंगाल-बांग्लादेश सीमा के इस हिस्से में पद्मा-गंगा का जलक्षेत्र स्थानीय नदी यातायात के लिए जोखिमभरा बना रहता है, विशेषकर अस्थिर मौसम में। दोनों पक्षों ने इस घटना को घुसपैठ के बजाय बचाव और वापसी से जुड़ा मामला माना।