चंडीमंदिर, 18 सितंबर 2026: समय-संवेदनशील मानवीय अभियान के तहत भारतीय सेना की पश्चिमी कमान की एक सेना विमानन स्क्वाड्रन ने पीजीआईएमएस रोहतक से कमांड अस्पताल, चंडीमंदिर तक एक दान किए गए गुर्दे का रात में हवाई परिवहन किया। इस त्वरित कार्रवाई से एक सेवारत जूनियर कमीशंड अधिकारी का जीवन बचाने में मदद मिली।
दान किए गए अंग की उपयोगिता तेज़ परिवहन पर निर्भर थी, इसलिए सेना विमानन दल ने रात के समय यह मिशन पूरा किया। इससे गुर्दा निर्धारित समय-सीमा के भीतर कमांड अस्पताल की प्रत्यारोपण टीम तक पहुंच सका।
इस अभियान में सेना विमानन, चिकित्सा टीमों और नागरिक प्रशासन के बीच घनिष्ठ समन्वय रहा। नागरिक अधिकारियों ने सुरक्षित ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था की, ताकि अंग के परिवहन के अलग-अलग चरणों में तेज़ और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित हो सके।
कमांड अस्पताल, चंडीमंदिर पहुंचने के बाद चिकित्सकों की एक टीम ने सेवारत जूनियर कमीशंड अधिकारी का गुर्दा प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किया।
इस जीवनरक्षक प्रयास के केंद्र में दाता के परिवार का वह निर्णय था, जिसमें उन्होंने अपनी क्षति के बाद अंग दान करने की सहमति दी। उनकी सहमति ने यह प्रत्यारोपण संभव बनाया और सेना के जवान को नया जीवन देने की संभावना पैदा की।
पश्चिमी कमान ने इस अभियान को समय के विरुद्ध चलाया गया मिशन बताया और अंग के सुरक्षित परिवहन तथा प्रत्यारोपण की सफल पूर्ति में दिखाई गई सटीकता और सहज समन्वय को रेखांकित किया।
रात के इस मिशन ने दिखाया कि चिकित्सीय आपात स्थिति में, जब हर मिनट महत्वपूर्ण हो, तब सेना विमानन, सैन्य चिकित्सा सेवाएं और नागरिक प्रशासन मिलकर कितनी प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं।