भारतीय सेना की पूर्वी कमान ने भारतीय सेना और असम राइफल्स के कर्मियों के लिए संयुक्त काउंटर-आईईडी प्रशिक्षण आयोजित किया है। यह प्रशिक्षण उभरते विस्फोटक खतरों के खिलाफ संचालनगत तैयारी को मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा था।
यह प्रशिक्षण पूर्वी कमान की काउंटर विस्फोटक उपकरण इकाई ने कराया। इसका मुख्य ध्यान ऐसे विशेष कौशल विकसित करने पर रहा, जिनकी जरूरत संचालन क्षेत्रों में आईईडी खतरों का पता लगाने, उन्हें बाधित करने और निष्क्रिय करने के लिए होती है।
इस पहल के तहत प्रशिक्षण देने वाले प्रशिक्षकों का एक पाठ्यक्रम भी आयोजित किया गया, ताकि भाग लेने वाले कर्मियों को उन्नत काउंटर-आईईडी विशेषज्ञता दी जा सके। कार्यक्रम में खतरे की जागरूकता, खोज प्रक्रिया, काउंटर-आईईडी अभ्यास और समन्वित प्रतिक्रिया तंत्र शामिल थे।
संयुक्त प्रशिक्षण में भारतीय सेना और असम राइफल्स के सैनिक शामिल हुए। इससे समन्वय बढ़ाने और आईईडी से जुड़े खतरों पर प्रतिक्रिया के लिए साझा प्रक्रियाएं विकसित करने का अवसर मिला।
सेना के अनुसार, इस कार्यक्रम का उद्देश्य दोनों बलों के बीच तालमेल और संयुक्तता को मजबूत करना था। साथ ही बदलती आईईडी रणनीतियों और खतरों के प्रति प्रभावी प्रतिक्रिया देने की क्षमता को भी बेहतर बनाना था।
ऐसा विशेष प्रशिक्षण उन क्षेत्रों में तैनात कर्मियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां तात्कालिक विस्फोटक उपकरण सैनिकों, काफिलों और सुरक्षा अभियानों के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकते हैं। इस अभ्यास ने पूर्वी कमान के क्षमता विकास, समन्वित प्रतिक्रिया और संचालनगत तैयारियों पर जोर को भी रेखांकित किया।