नौसेना उच्चतर कमान पाठ्यक्रम-39 के अधिकारियों ने अपने व्यावसायिक सैन्य अनुभव के तहत चंडीमंदिर स्थित पश्चिमी कमान मुख्यालय और खड़गा कोर का दौरा किया। इस दौरान संयुक्तता, एकीकृत अभियानों और युद्ध की बदलती प्रकृति पर ध्यान केंद्रित किया गया।
दौरे के दौरान पाठ्यक्रम के प्रतिभागियों को पश्चिमी मोर्चे पर बदलते परिचालन परिवेश, स्ट्राइक कोर अभियानों के संचालन और बहु-क्षेत्रीय क्षमताओं के एकीकृत उपयोग के बारे में जानकारी दी गई।
इन बैठकों में प्रौद्योगिकी-समर्थित युद्ध संचालन की बढ़ती भूमिका और उभरती परिचालन चुनौतियों से निपटने के लिए विभिन्न क्षेत्रों की क्षमताओं को जोड़ने के महत्व को भी रेखांकित किया गया।
लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह, एवीएसएम, एसएम**, सेना कमांडर, पश्चिमी कमान ने एनएचसीसी-39 के अधिकारियों से बातचीत की और समकालीन तथा भविष्य के युद्ध को आकार देने वाले बदलावों पर अपने विचार साझा किए।
सेना कमांडर ने पाठ्यक्रम के प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए सशस्त्र बलों के बीच संयुक्तता, एकीकरण और पारस्परिकता पर जोर दिया। उन्होंने भावी सैन्य नेताओं से संयुक्त युद्ध-दृष्टि विकसित करने और साथ ही अनुकूलनशील, प्रौद्योगिकी-संपन्न तथा परिचालन रूप से चुस्त बने रहने का आग्रह किया।
यह व्यावसायिक अनुभव नौसेना उच्चतर कमान पाठ्यक्रम के अधिकारियों को थल युद्ध संरचनाओं तथा अन्य सेवाओं और क्षेत्रों की क्षमताओं के साथ उनके एकीकरण की गहरी समझ प्रदान करने का अवसर भी बना।
यह दौरा सशस्त्र बलों के संयुक्तता और एकीकरण को मजबूत करने, व्यावसायिक सैन्य चिंतन को बढ़ावा देने और भावी सैन्य नेताओं को बहु-क्षेत्रीय समन्वित अभियानों के लिए तैयार करने पर जारी ध्यान को दर्शाता है।