नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2026: केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) 1 नवंबर 2026 से अपने प्रशासनिक और परिचालन कमान ढांचे का बड़ा कार्यात्मक पुनर्गठन लागू करेगा। गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद यह बदलाव बल को मुख्यतः क्षेत्रीय निगरानी आधारित व्यवस्था से हटाकर क्षेत्र-आधारित और क्षेत्र-विशेष ढांचे की ओर ले जाएगा। इसका उद्देश्य देश की महत्वपूर्ण अवसंरचना और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक मजबूत करना है।
नई व्यवस्था के तहत एक ही आर्थिक या रणनीतिक क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठानों को, उनकी भौगोलिक स्थिति चाहे जो भी हो, एक साझा कमान के अधीन लाया जाएगा। इससे परिचालन निगरानी बेहतर होने, क्षेत्र-विशेष विशेषज्ञता विकसित होने, सुरक्षा प्रक्रियाओं का मानकीकरण होने और संबंधित मंत्रालयों, विभागों तथा प्रतिष्ठान प्रबंधन के साथ समन्वय मजबूत होने की उम्मीद है।
क्षेत्रों का नया वर्गीकरण
पुनर्गठन के तहत मौजूदा क्षेत्रीय कमानों के नाम और दायरे में बदलाव किया गया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र कमान अब सरकारी भवन, संग्रहालय, स्मारक और सामूहिक तीव्र परिवहन प्रणाली क्षेत्र होगी, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में रहेगा। इसके अंतर्गत सरकारी भवन, संग्रहालय, ऐतिहासिक स्मारक और दिल्ली मेट्रो सहित सामूहिक तीव्र परिवहन प्रणालियां आएंगी।
उत्तरी क्षेत्र, नई दिल्ली, अब पावर-1 क्षेत्र होगा, जबकि उत्तर-पूर्वी क्षेत्र-2, कोलकाता, पावर-2 क्षेत्र के रूप में कार्य करेगा। पूर्वी क्षेत्र, रांची, कोयला क्षेत्र बनेगा। मध्य क्षेत्र, भिलाई, इस्पात क्षेत्र के रूप में पुनर्गठित होगा। उत्तर-पूर्वी क्षेत्र, गुवाहाटी, अब पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस क्षेत्र होगा।
पश्चिमी क्षेत्र, मुंबई, पश्चिम तटीय बंदरगाह क्षेत्र बनेगा और दक्षिण क्षेत्र, चेन्नई, पूर्वी तटीय बंदरगाह क्षेत्र होगा। इसके अलावा, बेंगलुरु में परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग क्षेत्र, नई दिल्ली में हवाईअड्डा क्षेत्र-1 और बेंगलुरु में हवाईअड्डा क्षेत्र-2 अपनी मौजूदा विशेष कार्यात्मक व्यवस्थाओं के तहत ही बने रहेंगे।
पुनर्गठन का उद्देश्य और लाभ
सीआईएसएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, ऊर्जा और रणनीतिक क्षेत्रों की संचालन प्रक्रियाएं, अवसंरचना, संभावित खतरे और सुरक्षा कमजोरियां अलग-अलग होती हैं। इन्हें एकीकृत कमानों के तहत रखने से विशेष निगरानी, केंद्रित प्रशिक्षण, क्षेत्र-विशेष मानक संचालन प्रक्रियाएं, विशेषज्ञ कार्मिकों के बेहतर उपयोग और ग्राहक संगठनों के साथ अधिक घनिष्ठ समन्वय को बढ़ावा मिलेगा।
बल का कहना है कि यह पुनर्गठन भारत की रणनीतिक और आर्थिक संपत्तियों की सुरक्षा के लिए एक अधिक विशेषज्ञ, क्षेत्र-विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। इससे परिचालन जवाबदेही और कार्यप्रणाली में एकरूपता भी बढ़ेगी। यह कदम पिछले 25 वर्षों में विमानन सुरक्षा और परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष विभाग के अधीन प्रतिष्ठानों में कार्यात्मक कमानों के सीआईएसएफ अनुभव पर आधारित है।
बंदरगाह सुरक्षा और बढ़ती जिम्मेदारियां
पश्चिम तटीय बंदरगाह क्षेत्र, मुंबई, और पूर्वी तटीय बंदरगाह क्षेत्र, चेन्नई, का गठन विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत में लगभग 250 बड़े और छोटे समुद्री बंदरगाह हैं। सीआईएसएफ फिलहाल महाराष्ट्र के जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह और गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह सहित 13 प्रमुख बंदरगाहों की सुरक्षा करता है।
पिछले वर्ष केंद्र ने अंतरराष्ट्रीय जहाज और बंदरगाह सुविधा सुरक्षा संहिता के तहत मान्यता प्राप्त सुरक्षा संगठन के रूप में मान्यता मिलने के बाद सीआईएसएफ को समुद्री बंदरगाहों की सुरक्षा के लिए नोडल बल घोषित किया था। समर्पित तटीय क्षेत्रों से बंदरगाह सुरक्षा में विशेष विशेषज्ञता विकसित होने, प्रक्रियाओं के मानकीकरण और बंदरगाह प्राधिकरणों के साथ समन्वय बेहतर होने की उम्मीद है।
यह पुनर्गठन ऐसे समय में हो रहा है जब सीआईएसएफ की जिम्मेदारियां पारंपरिक औद्योगिक सुरक्षा से आगे बढ़ रही हैं। बल को जम्मू-कश्मीर की उच्च-सुरक्षा कारागारों में सुरक्षा की जिम्मेदारी भी दी गई है और उसे महत्वपूर्ण अवसंरचना की हवाई सुरक्षा के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है। साथ ही, वह विशेष प्रशिक्षण और प्रमुख संस्थानों के साथ सहयोग के माध्यम से साइबर सुरक्षा, ड्रोन और ड्रोन-रोधी क्षमताओं को भी मजबूत कर रहा है।
1969 में स्थापित और नई दिल्ली मुख्यालय वाला सीआईएसएफ हवाईअड्डों, समुद्री बंदरगाहों, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष सुविधाओं, बिजली संयंत्रों, इस्पात संयंत्रों, कोयला खदानों, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस इकाइयों, सरकारी भवनों, स्मारकों और सामूहिक परिवहन प्रणालियों सहित अनेक महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करता है। गृह मंत्रालय से स्वीकृत ये बदलाव 1 नवंबर 2026 से प्रभावी होंगे।