महाराष्ट्र सरकार ने असम में सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान दुर्घटना में जान गंवाने वाले फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरागकर के माता-पिता को एक करोड़ रुपये की अनुग्रह सहायता दी है। नागपुर के रहने वाले पूर्वेश की 5 मार्च 2026 को कार्बी आंगलोंग जिले में हुए हादसे में मृत्यु हो गई थी। उनके साथ स्क्वाड्रन लीडर अनुज वशिष्ठ भी जान गंवा बैठे थे।
जिला सैनिक कल्याण अधिकारी मेजर आनंद पाठरकर (सेवानिवृत्त) ने गुरुवार को नागपुर में पूर्वेश के पिता रवींद्र दुरागकर और मां संध्या दुरागकर को सहायता राशि के चेक सौंपे। दोनों को 50-50 लाख रुपये दिए गए। मेजर पाठरकर ने बताया कि राज्य सरकार ने माता-पिता के लिए एक करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि मंजूर की थी और स्वीकृति मिलने के बाद चेक सौंपे गए।
पूर्वेश पूर्वी वायु कमान की एक अग्रिम पंक्ति की लड़ाकू स्क्वाड्रन में सुखोई-30 एमकेआई पर नेविगेटर के रूप में तैनात थे। हादसे वाले दिन विमान ने प्रशिक्षण उड़ान के लिए वायु सेना स्टेशन जोरहाट से उड़ान भरी थी। शाम करीब 7:42 बजे उसका रडार से संपर्क टूट गया।
विमान एयरबेस से लगभग 60 किलोमीटर दूर कार्बी आंगलोंग के इंग्लोंग एकोपी/रोंगखेलान के पास एक दुर्गम, पहाड़ी और वन क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हुआ। अगले दिन मलबा मिलने के बाद भारतीय वायु सेना ने दोनों की मृत्यु की पुष्टि की थी। दोनों में से कोई भी विमान से इजेक्ट नहीं कर सका था।

वर्ष 1998 में जन्मे पूर्वेश की उम्र करीब 28 वर्ष थी। उन्होंने 2015 में नागपुर के साउथ पब्लिक स्कूल से दसवीं की पढ़ाई पूरी की और बाद में डॉ. आंबेडकर कॉलेज से कंप्यूटर साइंस में बीएससी की डिग्री ली। रक्षा सेवाओं की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के दौरान उन्होंने भंडारा की डिफेंस सर्विसेज अकादमी में प्रशिक्षण लिया था।
पूर्वेश राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) में सक्रिय रहे और छह राष्ट्रीय शिविरों में महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने एयरो-मॉडलिंग प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लिया था। एएफकैट के जरिए वायु सेना में चयन के बाद उन्हें 7 दिसंबर 2022 को फ्लाइंग ऑफिसर के पद पर कमीशन मिला। बाद में वे फ्लाइट लेफ्टिनेंट बने। उनकी मूल तैनाती तेजपुर में थी, लेकिन वहां रनवे पर काम चलने के कारण वे जोरहाट से उड़ान संचालन कर रहे थे।

उन्होंने मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर में भी भाग लिया था। उनके परिवार में माता-पिता के अलावा बहन सायली हैं, जो अमेरिका में रहती हैं। हादसे से करीब 10 दिन पहले पूर्वेश नागपुर में अपने परिवार से मिलने आए थे।
महाराष्ट्र की नीति के तहत राज्य के ऐसे सैन्यकर्मियों के निकटतम परिजनों को एक करोड़ रुपये की अनुग्रह सहायता दी जाती है, जिनकी युद्ध कार्रवाई या सैन्य अभियानों में मृत्यु हो जाती है। पहले कम रही सहायता राशि को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने के बाद एक करोड़ रुपये का प्रावधान 2019 से लागू है। पूर्वेश के मामले में हादसे के लगभग आठ महीने बाद सहायता की प्रक्रिया पूरी कर राशि दी गई।
भारतीय वायु सेना ने हादसे के बाद शोक जताते हुए कहा था कि उसके सभी कर्मी शोकाकुल परिवारों के साथ मजबूती से खड़े हैं। यह दुर्घटना हाल के वर्षों में पूर्वोत्तर में सुखोई-30 एमकेआई से जुड़े हादसों में नवीनतम थी।