हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर में पॉलिटेक्निक छात्र सर्वेश शर्मा छात्रावास की इमारत से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। उनका इलाज हमीरपुर में चल रहा है और उन्हें पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ रेफर करने की तैयारी की गई है। सर्वेश का नाम पहले सेना के लिए ड्रोन बनाने की 3.5 करोड़ रुपये की अनुदान संबंधी मीडिया रिपोर्टों में आया था। इस अनुदान के दावे को अब iDEX/DIO ने फर्जी बताया है।
घटना बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 की दोपहर राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज, हमीरपुर (बड़ू) के छात्रावास में हुई। सर्वेश कंप्यूटर इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर के छात्र हैं। अधिकतर स्थानीय रिपोर्टों में उनके तीसरी मंजिल से गिरने की बात कही गई है, जबकि कुछ में दूसरी मंजिल का उल्लेख है।
शुरुआती रिपोर्टों में चक्कर आने से संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई गई है। हालांकि, पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है। गिरना हादसा था या इसकी कोई अन्य वजह थी, इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
स्थानीय खबरों के अनुसार, सर्वेश के पैर में फ्रैक्चर है और जबड़े व गर्दन में भी गंभीर चोटें आई हैं। उन्हें डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज, हमीरपुर के कैजुअल्टी वार्ड में भर्ती कराया गया। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देशराज शर्मा ने इलाज जारी होने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने मुफ्त उपचार के निर्देश दिए हैं।
28 अक्टूबर की शाम तक उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उनकी हालत गंभीर थी और बेहतर इलाज के लिए उन्हें पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर), चंडीगढ़ भेजने की व्यवस्था की जा रही थी। हालांकि, उस समय तक उन्हें चंडीगढ़ ले जाए जाने की पुष्टि नहीं हुई थी।
हमीरपुर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधीक्षक बलबीर ठाकुर और स्थानीय पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
सर्वेश हमीरपुर जिले के बहनवी गांव के रहने वाले हैं और उनके पिता दिहाड़ी मजदूर हैं। सितंबर 2026 में कई मीडिया संस्थानों ने खबर दी थी कि भारतीय सेना के लिए ‘रुद्र एज टी-1 (स्पेक्ट्रा)’ नाम का स्वदेशी निगरानी ड्रोन विकसित करने के लिए उन्हें 3.5 करोड़ रुपये का अनुदान मिला है। रिपोर्टों में इस अनुदान को रक्षा मंत्रालय के डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन (DIO) और इनोवेशंस फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (iDEX) कार्यक्रम से जुड़ा बताया गया था।
इन खबरों में दावा किया गया था कि ड्रोन ऊंचाई वाले सीमावर्ती इलाकों में इस्तेमाल के लिए बनाया जाना है और उसमें रडार की पकड़ में आने की संभावना कम करने तथा जैमिंग का मुकाबला करने की क्षमताएं होंगी। रिपोर्टों के अनुसार, सर्वेश ने इससे पहले करीब 87 हजार रुपये में कम लागत वाला एक प्रोटोटाइप बनाया था। उनकी टीम ने आईआईटी जोधपुर और कोणार्क कोर की राष्ट्रीय स्तर की ड्रोन प्रतियोगिता में चौथा स्थान हासिल किया था और उसे 10 लाख रुपये का पुरस्कार मिला था। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने भी लगभग 23 सितंबर 2026 को सर्वेश को सम्मानित किया था।

हालांकि, छात्रावास से गिरने की घटना वाले दिन ही, 28 अक्टूबर को iDEX/DIO के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ने अनुदान संबंधी दावे का खंडन किया। संगठन ने स्पष्ट किया कि सेना के लिए ड्रोन बनाने के वास्ते सर्वेश शर्मा को 3.5 करोड़ रुपये का iDEX अनुदान मंजूर किए जाने का दावा फर्जी है। उसने बताया कि ऐसी खबरें करीब दो महीने से प्रसारित हो रही थीं और लोगों से इन्हें साझा करने से पहले आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि करने को कहा।
अनुदान के दावे से अलग, कम लागत वाले ड्रोन प्रोटोटाइप पर सर्वेश के काम और प्रतियोगिता में उनकी भागीदारी का उल्लेख स्थानीय तथा राष्ट्रीय मीडिया की खबरों में दर्ज है।