पुणे, 7 नवंबर 2026: दक्षिणी कमान के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार ने 6 नवंबर को पुणे स्थित सशस्त्र बल चिकित्सा महाविद्यालय (एएफएमसी) का दौरा किया। उन्होंने संस्थान की चिकित्सा प्रशिक्षण सुविधाओं, शोध कार्यों और स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमताओं की समीक्षा की।
दौरे के दौरान उन्होंने एएफएमसी के निदेशक एवं कमांडेंट सर्जन वाइस एडमिरल मनीष होनवाड से मुलाकात की। उन्हें संस्थान के इतिहास, सैन्य चिकित्सा में योगदान, जारी शोध कार्यक्रमों और चिकित्सा शिक्षा पहलों की जानकारी दी गई।
लेफ्टिनेंट जनरल कुमार को उन्नत प्रशिक्षण सुविधाओं और चिकित्सा शिक्षा में आधुनिक तकनीक, शोध तथा नए शिक्षण तरीकों को शामिल करने के प्रयासों से भी अवगत कराया गया। एएफएमसी सशस्त्र बलों की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और सैन्य चिकित्सा की बदलती जरूरतों के लिए कुशल पेशेवर तैयार करने में भूमिका निभाता है।
उन्होंने हेल्थ ट्रेनिंग असेसमेंट सेंटर का दौरा किया, जहां चिकित्सा पेशेवरों के स्वास्थ्य सेवा संबंधी कौशल और दक्षताओं का आकलन एवं विकास किया जाता है। वार सर्जरी म्यूजियम में उन्हें युद्धक्षेत्र में चिकित्सा देखभाल, युद्ध में लगी चोटों और सैन्य शल्य चिकित्सा के विकास से जुड़ी जानकारी मिली।


सर्जिकल स्किल्स लैब में उन्होंने व्यावहारिक शल्य चिकित्सा प्रशिक्षण और चिकित्सा कर्मियों की तकनीकी दक्षता बढ़ाने के लिए बनाई गई सुविधाओं की समीक्षा की। इस तरह का प्रशिक्षण सैन्य डॉक्टरों को जटिल चिकित्सा आपात स्थितियों और युद्ध में लगी चोटों से निपटने के लिए तैयार करने में मदद करता है।

दौरे में सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च और चिकित्सा अनुसंधान विभाग भी शामिल थे। यहां उन्हें सशस्त्र बलों से जुड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों पर जारी शोध और चिकित्सा ज्ञान तथा अनुसंधान क्षमता बढ़ाने की पहलों की जानकारी दी गई। चर्चा में आधुनिक सैन्य अभियानों के लिए चिकित्सा अनुसंधान, सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण और विशेष स्वास्थ्य शिक्षा के महत्व पर भी बात हुई।
1948 में स्थापित एएफएमसी, पुणे, देश के प्रमुख चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों में से एक है। यह सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा के लिए चिकित्सा पेशेवरों को प्रशिक्षित करता है। यह सेवा भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के कर्मियों को स्वास्थ्य सहायता देती है।
एएफएमसी का शैक्षणिक कार्यक्रम, शोध और विशेष प्रशिक्षण सैन्य चिकित्सा, अभियान के दौरान स्वास्थ्य देखभाल और हताहतों के उपचार से जुड़े क्षेत्रों में योगदान देते हैं।