वैरेंगटे स्थित काउंटर इंसर्जेंसी एंड जंगल वारफेयर (सीआईजेडब्ल्यू) स्कूल के कमांडेंट मेजर जनरल कुलवीर सिंह ने 1971 के भारत-पाक युद्ध के अनुभवी अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल आनंद स्वरूप (सेवानिवृत्त) से शिष्टाचार भेंट की। महावीर चक्र से सम्मानित लेफ्टिनेंट जनरल स्वरूप इस प्रशिक्षण संस्थान के कमांडेंट भी रह चुके हैं।
मुलाकात के दौरान मेजर जनरल कुलवीर सिंह ने उनके साहस, नेतृत्व और देश के प्रति सेवाओं का सम्मान किया। इस अवसर पर बांग्लादेश की मुक्ति में योगदान देने वाले सैनिकों के बलिदान और 1971 के युद्ध में लेफ्टिनेंट जनरल स्वरूप की भूमिका को याद किया गया।
1971 के युद्ध के समय आनंद स्वरूप ब्रिगेडियर थे और किलो फोर्स की कमान संभाल रहे थे। इस सैन्य गठन में भारतीय सेना की इकाइयों के साथ मुक्ति बाहिनी के सदस्य और अन्य सहयोगी बल शामिल थे। किलो फोर्स ने तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी सेनाओं के खिलाफ महत्वपूर्ण अभियान चलाए। इन अभियानों ने दिसंबर 1971 में बांग्लादेश की मुक्ति में अहम योगदान दिया।

युद्ध में असाधारण वीरता और उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए लेफ्टिनेंट जनरल स्वरूप को महावीर चक्र प्रदान किया गया था। यह युद्धकाल में वीरता के लिए दिया जाने वाला भारत का दूसरा सर्वोच्च सम्मान है।
इस भेंट से सीआईजेडब्ल्यू स्कूल के साथ उनके पुराने जुड़ाव की भी याद ताजा हुई। कमांडेंट के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने संस्थान की सैन्य प्रशिक्षण परंपरा में योगदान दिया था।
मिजोरम के वैरेंगटे में स्थित सीआईजेडब्ल्यू स्कूल भारतीय सेना के प्रमुख प्रशिक्षण संस्थानों में शामिल है। यहां उग्रवाद-रोधी अभियानों, जंगल युद्ध और दुर्गम इलाकों में लड़ाई का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण में सामरिक दक्षता, नेतृत्व, बदलती परिस्थितियों के अनुरूप ढलने और अभियान के लिए तैयार रहने पर जोर दिया जाता है। संस्थान मित्र देशों के सैन्यकर्मियों को भी विशेष प्रशिक्षण देता है।