ग्लासगो में 27 जुलाई को भारतीय मुक्केबाज जडुमणि सिंह मङ्गेबम ने पुरुषों के 55 किलोग्राम वर्ग के राउंड ऑफ 16 में पाकिस्तान के सुमामा रहमान को सर्वसम्मत 5-0 से हराकर क्वार्टरफाइनल में जगह बना ली। यह मुकाबला स्कॉटिश इवेंट कैंपस में रविवार रात खेला गया।
22 वर्षीय मणिपुरी मुक्केबाज ने शुरुआती प्रतिस्पर्धी दौर के बाद इस हाई-वोल्टेज भारत-पाकिस्तान मुकाबले पर पूरी तरह नियंत्रण बना लिया। इस जीत से भारत की पदक उम्मीदें वर्ग में बनी रहीं।
यह मुकाबला इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि यह कारगिल विजय दिवस के साथ हुआ, जो 1999 के कारगिल युद्ध में भारत की जीत की स्मृति में मनाया जाता है।
मुकाबले का विवरण
रहमान पहले दौर में बाई लेकर आए थे और ऊंचाई तथा पहुंच में स्पष्ट बढ़त रखते थे। उन्होंने लंबी मुक्कों और जवाबी प्रहारों से दूरी बनाकर खेल को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश की, जबकि जडुमणि ने अपनी तेज गति, पैरों की चाल और सटीक संयोजन से बार-बार नजदीक पहुंच बनाई।
पहला दौर काफी कड़ा रहा और दोनों मुक्केबाजों ने एक-दूसरे पर प्रहार किए। जडुमणि की सटीकता और संयम ने न्यायाधीशों के अंकपत्र पर उन्हें मामूली बढ़त दिलाई। दूसरे दौर में उन्होंने पूरी तरह नियंत्रण हासिल कर लिया। उन्होंने रहमान के हमलों को चकमा दिया, सटीक मुक्के लगाए और पाकिस्तानी मुक्केबाज को खड़े-खड़े आठ गिनती तक पहुंचा दिया।
तीसरे और अंतिम दौर में रहमान ने दबाव बढ़ाया, लेकिन जडुमणि की रक्षा, चाल और रिंग पर पकड़ ने किसी भी तरह की वापसी की गुंजाइश नहीं छोड़ी। सभी पांच न्यायाधीशों ने मुकाबला 5-0 से भारतीय मुक्केबाज के पक्ष में दिया।
कारगिल विजय दिवस पर समर्पण
मुकाबले के बाद जडुमणि ने इस जीत को कारगिल युद्ध के वीरों को समर्पित किया।
उन्होंने एएनआई से कहा, “मैं अपनी जीत कारगिल के वीरों को समर्पित करता हूं। पाकिस्तान के खिलाफ जीतकर बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। मैं क्वार्टरफाइनल में और बेहतर प्रदर्शन करूंगा और भारत के लिए स्वर्ण पदक सुनिश्चित करूंगा।”
यह जीत उसी दिन आई जब देश ने 27वां कारगिल विजय दिवस मनाया, जिससे रिंग के भीतर इस भारत-पाकिस्तान टकराव का भावनात्मक महत्व और बढ़ गया।
ग्लासगो तक का सफर और मौजूदा फॉर्म
मणिपुर के जडुमणि ने अपने राष्ट्रमंडल खेल अभियान की शुरुआत भी इसी तरह की 5-0 की सर्वसम्मत जीत से की थी। उन्होंने शुक्रवार को राउंड ऑफ 32 में स्कॉटलैंड के घरेलू पसंदीदा आरोन कलन को हराया था।
50 किलोग्राम वर्ग से इस सत्र में ऊपर बढ़ने के बाद उनके प्रदर्शन में निरंतर मजबूती दिखी है। पिछले वर्ष नोएडा में विश्व मुक्केबाजी कप फाइनल्स में उन्होंने 50 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता था। वजन वर्ग बदलने के बाद अतिरिक्त ताकत और बेहतर रिकवरी ग्लासगो में उनके प्रदर्शन में साफ दिखी है।
अगला मुकाबला
जडुमणि अब मंगलवार को क्वार्टरफाइनल में इंग्लैंड के एलिस ट्रोब्रिज से भिड़ेंगे। जीत मिलने पर वे सेमीफाइनल में पहुंच जाएंगे और कम से कम कांस्य पदक पक्का हो जाएगा, क्योंकि राष्ट्रमंडल खेलों की मुक्केबाजी में दोनों पराजित सेमीफाइनलिस्टों को पदक मिलता है।
यह परिणाम भारतीय मुक्केबाजी के लिए सकारात्मक दिन का हिस्सा रहा। एशियाई खेलों की कांस्य पदक विजेता प्रीति पवार भी महिला 54 किलोग्राम वर्ग के क्वार्टरफाइनल में पहुंच गईं, जबकि लवलीना बोरगोहेन को अपनी श्रेणी में सीधे सेमीफाइनल में बाई मिलने से कम से कम कांस्य पदक सुनिश्चित हो गया।
भारत-पाकिस्तान मुकाबले के दबाव को जिस तरह जडुमणि ने संभाला और जीत के बाद जो समर्पण दिया, उसने ग्लासगो खेलों की शुरुआत में भारतीय दल और प्रशंसकों को यादगार क्षण दिया। अब सबकी नजरें उनके क्वार्टरफाइनल मुकाबले पर हैं, जहां वे राष्ट्रमंडल खेलों के पदक की अपनी कोशिश आगे बढ़ाएंगे।