नई दिल्ली: भारतीय नौसेना 2035 तक 200 से अधिक युद्धपोतों वाली शक्ति बनने की दिशा में तेजी से विस्तार कर रही है। यह कदम हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती नौसैनिक मौजूदगी और पाकिस्तान द्वारा उन्नत चीनी-निर्मित पनडुब्बियों को शामिल किए जाने की पृष्ठभूमि में उठाया जा रहा है। यह योजना भारत की समुद्री रणनीति और आत्मनिर्भर भारत के तहत स्वदेशीकरण की व्यापक पहल का एक केंद्रीय हिस्सा है।
नौसेना प्रमुख एडमिरल ने कई बार इस लक्ष्य पर जोर दिया है। उनके अनुसार नौसेना 2035 तक 200 से अधिक जहाजों वाली समुद्री शक्ति बनने की राह पर है, जबकि 2047 तक पूरी तरह आत्मनिर्भर बल बनने का दीर्घकालिक लक्ष्य भी रखा गया है।
वर्तमान क्षमता और निर्माण गति
भारतीय नौसेना के पास फिलहाल लगभग 140 से 150 जलपोत हैं, जिनमें करीब 135 अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू प्लेटफॉर्म शामिल हैं। इनमें विध्वंसक, फ्रिगेट, कार्वेट और पनडुब्बियां आती हैं। देश के विभिन्न जहाज निर्माण कारखानों में लगभग 50 युद्धपोत और पनडुब्बियां निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा 65 सतही जहाजों और कई पनडुब्बियों से जुड़े स्वीकृत परियोजनाओं का बड़ा खाका पहले से मौजूद है, जिनकी लागत 2.35 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
नौसेना की शामिल करने की गति भी काफी बढ़ी है। औसतन हर 40 दिन में एक नया स्वदेशी युद्धपोत या पनडुब्बी जोड़ी जा रही है। 2025 में नौसेना ने लगभग 12 युद्धपोत और एक पनडुब्बी को शामिल किया। 2026 के लिए 15 से 19 अतिरिक्त जलपोतों को शामिल करने की योजना है।
हालिया उपलब्धियों से इस गति का संकेत मिलता है। जुलाई 2026 में नौसेना ने कम समय के भीतर दो प्रमुख प्लेटफॉर्म शामिल किए।
INS महेंद्रगिरि, नीलगिरि श्रेणी का छठा स्टील्थ फ्रिगेट है, जिसे मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ बनाया है। नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा तैयार इस पोत को विशाखापत्तनम में शामिल किया गया।
INS मालवान, माhe श्रेणी का दूसरा एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट है, जिसे कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ बनाया है। 78 मीटर लंबा और 1,100 टन वजनी यह पोत कारवार में शामिल किया गया। इसे तटीय पनडुब्बी रोधी अभियानों, बारूदी सुरंग बिछाने और कम तीव्रता वाले समुद्री कार्यों के लिए अनुकूलित किया गया है।
प्रोजेक्ट 17A का सातवां और अंतिम फ्रिगेट INS विंध्यगिरि जल्द शामिल किए जाने की उम्मीद है, जबकि प्रोजेक्ट 17B के तहत अगला चरण भी पहले से योजना में है।
चीन और पाकिस्तान से जुड़ी रणनीतिक जरूरतें
यह विस्तार क्षेत्रीय चुनौतियों के स्पष्ट संकेतों के बीच किया जा रहा है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी, यानी PLAN, जलपोतों की संख्या के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना है, जिसके पास 370 से अधिक जहाज और पनडुब्बियां हैं। बीजिंग ने बंदरगाह पहुंच समझौतों, अनुसंधान और सर्वेक्षण पोतों तथा पनडुब्बी तैनाती के जरिए हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ाई है।
पाकिस्तान ने भी अपनी पानी के भीतर की क्षमता को मजबूत किया है। अप्रैल 2026 में उसने चीन में निर्मित आठ हंगोर श्रेणी की आक्रमणकारी पनडुब्बियों में से पहली पनडुब्बी PNS/M Hangor को शामिल किया। इनमें से चार पनडुब्बियां चीन में और चार कराची शिपयार्ड में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण व्यवस्था के तहत बन रही हैं। इससे अरब सागर और उत्तरी हिंद महासागर में पाकिस्तान की संचालन क्षमता काफी बढ़ेगी।
भारतीय नौसेना की योजना बनाने वाले अधिकारियों के अनुसार एक बड़ी और अधिक आधुनिक बेड़ा संरचना समुद्री नियंत्रण बनाए रखने, महत्वपूर्ण समुद्री संचार मार्गों की सुरक्षा करने और बहु-क्षेत्रीय समुद्री खतरों को रोकने के लिए जरूरी है।
पूर्ण स्वदेशी निर्माण की ओर बदलाव
वर्तमान अभियान की एक प्रमुख विशेषता जहाज निर्माण में पूरी आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ना है। जुलाई 2025 में रूस से प्राप्त INS तमाल वह अंतिम विदेशी मूल का प्रमुख युद्धपोत था जिसे नौसेना शामिल करने की योजना में रखती है। इसके बाद 200-जहाज लक्ष्य में गिना जाने वाला हर अगला जलपोत भारतीय जहाज निर्माण कारखानों में बनने की उम्मीद है।
नौसेना घटक स्तर तक आत्मनिर्भरता बढ़ाने का लक्ष्य भी रखती है, ताकि विशेष इस्पात, संवेदकों और उच्चस्तरीय प्रणालियों के आयात पर निर्भरता कम हो। प्रोजेक्ट 75(I) के तहत वायु-स्वतंत्र प्रणोदन वाली पारंपरिक पनडुब्बियां, अतिरिक्त एंटी-सबमरीन शैलो-वाटर क्राफ्ट, अगली पीढ़ी के फ्रिगेट और विध्वंसक इस प्रयास के मुख्य आधार हैं।
क्षमता बढ़ाने के व्यापक लक्ष्य
संख्या बढ़ाने के साथ-साथ गुणवत्ता सुधार पर भी जोर है। इसमें स्टील्थ विशेषताएं, उन्नत पनडुब्बी रोधी सेंसर और हथियार, लंबी दूरी की भूमि-आक्रमण मिसाइलें और बेहतर नेटवर्क-केंद्रित संचालन शामिल हैं। नौसेना अपने विमानन विंग और जल के भीतर की क्षमता का भी विस्तार कर रही है, ताकि एक संतुलित त्रि-आयामी बल तैयार किया जा सके जो लंबे समय तक उच्च समुद्री संचालन कर सके।
अधिकारियों का कहना है कि 2035 तक 200 जहाजों का लक्ष्य केवल चीन की संख्या का मुकाबला करने के लिए नहीं है, बल्कि एक तकनीकी रूप से उन्नत, युद्ध-तैयार और रणनीतिक रूप से स्वतंत्र बल खड़ा करने के लिए है, जो हिंद महासागर और उससे आगे भारत के हितों की रक्षा कर सके।
लगातार शामिल किए जा रहे नए जहाजों, घरेलू जहाज निर्माण की मजबूत श्रृंखला और स्पष्ट रणनीतिक दिशा के साथ भारतीय नौसेना अगले दशक में अपनी क्षमता में बड़ा उछाल लाने की तैयारी कर रही है।