केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी सीआरपीएफ परिवार के लिए यह एक गर्व का क्षण है। 118 बटालियन सीआरपीएफ के हेड कांस्टेबल/ड्राइवर सुनील के पुत्र आर्यन शेओराण ने संघ लोक सेवा आयोग की केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सहायक कमांडेंट) परीक्षा 2025 में अखिल भारतीय स्तर पर दूसरा स्थान हासिल किया है।
देश की इस अत्यंत प्रतिस्पर्धी परीक्षा में आर्यन का शानदार प्रदर्शन उनके परिवार, 118 बटालियन और पूरे सीआरपीएफ समुदाय के लिए बड़े सम्मान का कारण बना है। उनकी उपलब्धि ने बल से जुड़े कार्मिकों के बीच भी खुशी का माहौल पैदा किया है।
सीआरपीएफ (सहायक कमांडेंट) परीक्षा के माध्यम से भारत के केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में सहायक कमांडेंट के रूप में ग्रुप ए अधिकारियों की भर्ती की जाती है। चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा के बाद शारीरिक और चिकित्सकीय परीक्षण तथा व्यक्तित्व परीक्षण और साक्षात्कार शामिल होते हैं।
दूसरा स्थान हासिल करना आर्यन शेओराण की मजबूत अकादमिक तैयारी, धैर्य, अनुशासन और कठिन चयन प्रक्रिया में उनके निरंतर बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है। यह सफलता उनकी व्यक्तिगत मेहनत का परिणाम मानी जा रही है।
इस उपलब्धि का सीआरपीएफ परिवार के लिए विशेष महत्व है, क्योंकि आर्यन बल के एक सेवारत सदस्य के पुत्र हैं। उनके पिता हेड कांस्टेबल/ड्राइवर सुनील 118 बटालियन सीआरपीएफ में सेवाएं दे रहे हैं, और बेटे की इस सफलता ने यूनिट के जवानों के लिए भी गर्व का अवसर बना दिया है।
सीआरपीएफ ने आर्यन शेओराण को उनकी उल्लेखनीय उपलब्धि पर बधाई दी और उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं व्यक्त कीं। बल की ओर से इस सफलता को पूरे संगठन के लिए गौरव का विषय बताया गया है।
एक ऐसे परिवार में पले-बढ़े होने का प्रभाव, जो देश के बड़े केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों से जुड़ा है, वर्दीधारी सेवा की जिम्मेदारियों, अनुशासन और समर्पण की समझ को और गहरा कर सकता है। आर्यन की यह सफलता उन्हें अब देश की सुरक्षा व्यवस्था में अधिकारी के रूप में सेवा करने की दिशा में आगे ले जाती है।
सहायक कमांडेंट केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में एक महत्वपूर्ण नेतृत्व पद होता है। इस स्तर के अधिकारी अपने करियर के दौरान कमान, प्रशासन, कर्मियों के प्रबंधन और परिचालन जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं।
इसी कारण यूपीएससी की चयन प्रक्रिया इस तरह तैयार की गई है कि वह केवल अकादमिक क्षमता ही नहीं, बल्कि शारीरिक फिटनेस, नेतृत्व गुण, निर्णय क्षमता और अधिकारी स्तर की भूमिका के लिए आवश्यक व्यक्तित्व को भी परखे।
आर्यन शेओराण की यह दूसरी रैंक एक महत्वपूर्ण व्यक्तिगत उपलब्धि होने के साथ-साथ उनके परिवार के लिए भी एक गर्वपूर्ण उपलब्धि है। 118 बटालियन के कर्मियों के लिए यह सफलता इसलिए भी प्रेरणादायक है, क्योंकि यह बल से जुड़े समर्पण और सेवा के मूल्यों की पीढ़ियों तक पहुंच को दर्शाती है।
सीआरपीएफ परिवार ने आर्यन शेओराण और उनके परिजनों को हार्दिक बधाई दी है और उनकी इस उपलब्धि को बटालियन तथा पूरे बल के लिए अत्यंत गर्व का विषय बताया है। अखिल भारतीय स्तर पर दूसरा स्थान हासिल करने के साथ आर्यन अब वर्दीधारी सार्वजनिक सेवा की एक संभावनाशील यात्रा की शुरुआत कर रहे हैं।