ओडिशा के उच्च शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि राष्ट्रीय कैडेट कोर, यानी एनसीसी, के कैडेटों को अस्थायी डिग्री प्रमाणपत्र जारी होने के छह महीने के भीतर मूल डिग्री प्रमाणपत्र दिए जाएं। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शैक्षणिक प्रमाणन में देरी के कारण योग्य एनसीसी कैडेट सेना और अन्य सरकारी सेवाओं में भर्ती के अवसरों से वंचित न रह जाएं।
उच्च शिक्षा निदेशक काली प्रसन्न महापात्र ने हाल ही में राज्यभर के विश्वविद्यालयों के परीक्षा नियंत्रकों को यह निर्देश भेजा। उन्होंने संस्थानों से परीक्षा और प्रमाणन प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने तथा तय छह महीने की अवधि के भीतर मूल डिग्री प्रमाणपत्र जारी करने को कहा है।
विभाग ने कहा कि मूल डिग्री प्रमाणपत्र मिलने में देरी के कारण एनसीसी कैडेटों को रोजगार और भर्ती के अवसरों में कठिनाई हो रही है। कई भर्ती एजेंसियों में दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान निर्धारित समयसीमा के भीतर मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है। ऐसे में समय पर दस्तावेज न दे पाने वाले उम्मीदवार, पात्रता होने के बावजूद, अवसर खो सकते हैं।
यह नया निर्देश विशेष रूप से उन एनसीसी कैडेटों के लिए लाभकारी माना जा रहा है जो सशस्त्र बलों में शामिल होना चाहते हैं। भर्ती प्रक्रिया में दस्तावेजीकरण और सत्यापन की आवश्यकताएं महत्वपूर्ण होती हैं। इसके साथ ही यह केंद्रीय सरकारी सेवाओं के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की भी मदद करेगा, जहां भर्ती और नियुक्ति प्रक्रियाओं के दौरान मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र मांगे जा सकते हैं।
विश्वविद्यालयों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि मूल डिग्री प्रमाणपत्रों की छपाई, सत्यापन और वितरण सहित पूरी प्रक्रिया बिना अनावश्यक देरी के पूरी हो। उच्च शिक्षा विभाग ने संस्थानों से ऐसी व्यवस्था बनाने की सलाह दी है, जिससे प्रक्रिया पर निगरानी रखी जा सके और प्रमाणपत्र तय समय के भीतर छात्रों तक पहुंचें।
विभाग ने इस मुद्दे को प्राथमिकता दी है और विश्वविद्यालयों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इस कदम का उद्देश्य प्रशासनिक देरी को कम करना और छात्रों को ऐसे दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराना है, जो उच्च शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी भर्ती अवसरों के लिए आवश्यक हैं।
एनसीसी कैडेटों के लिए इस पहल का महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि राष्ट्रीय कैडेट कोर छात्रों को अनुशासन, नेतृत्व, शारीरिक प्रशिक्षण और राष्ट्र सेवा का संगठित अनुभव देता है। बड़ी संख्या में एनसीसी कैडेट अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद सशस्त्र बलों और अन्य वर्दीधारी सेवाओं में करियर बनाने की इच्छा रखते हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप ओडिशा के स्नातक शिक्षा ढांचे के तहत एनसीसी को छात्रों के लिए एक वैकल्पिक विषय के रूप में पेश किया जाता है। उच्च शिक्षा में एनसीसी का यह एकीकरण छात्रों को शैक्षणिक अध्ययन के साथ कोर से जुड़ी व्यवस्थित प्रशिक्षण गतिविधियों का अवसर देता है।
ओडिशा के शैक्षणिक संस्थानों में लगभग 63,000 एनसीसी कैडेट नामांकित हैं। ऐसे में समय पर शैक्षणिक प्रमाणन एक बड़ी छात्र-समुदाय के लिए महत्वपूर्ण प्रशासनिक आवश्यकता बन जाता है। सरकार का यह निर्देश विश्वविद्यालयों की प्रमाणन प्रणाली में होने वाली देरी के कारण एनसीसी कैडेटों को नुकसान से बचाने में व्यापक असर डालने वाला माना जा रहा है।
अस्थायी प्रमाणपत्र जारी होने के छह महीने के भीतर मूल प्रमाणपत्र देने की समयसीमा तय कर उच्च शिक्षा विभाग ने प्रमाणन प्रक्रिया में अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की कोशिश की है। यह कदम उन छात्रों को समय पर उनके मूल दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए है, जिन्होंने अपनी शैक्षणिक आवश्यकताएं पूरी कर ली हैं और जो बिना टाले जाने वाली प्रशासनिक बाधाओं के बिना भर्ती तथा अन्य करियर अवसरों की ओर बढ़ सकें।