रांची / नई दिल्ली: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने रांची में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के क्षेत्रीय वेतन एवं लेखा कार्यालय के तीन अधिकारियों को 48,400 रुपये की रिश्वत कथित रूप से लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह रिश्वत एक सीआईएसएफ जवान के लंबित बिलों को आगे बढ़ाने के लिए ली जा रही थी। बाद में विशेष सीबीआई अदालत ने आरोपियों को तीन दिन की एजेंसी हिरासत में भेज दिया।
गिरफ्तार अधिकारियों की पहचान वरिष्ठ लेखा अधिकारी संतोष कुमार माहतो और सहायक लेखा अधिकारी सुनील कुमार तथा सुजीत कुमार सिंह के रूप में हुई है। वे रांची के डोरंडा स्थित क्षेत्रीय वेतन एवं लेखा कार्यालय में तैनात थे। यह कार्यालय गृह मंत्रालय के अधीन काम करता है और सीआईएसएफ के साथ-साथ राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो जैसे अन्य केंद्रीय संगठनों के वेतन एवं लेखा कार्य संभालता है।
यात्रा और शिक्षा भत्ता के बिलों को लेकर शिकायत
यह मामला बुधवार, 26 अगस्त, 2026 को दर्ज किया गया, जब उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम इकाई में तैनात एक सीआईएसएफ हेड कांस्टेबल ने लिखित शिकायत दी। कई रिपोर्टों में शिकायतकर्ता का नाम रविकांत त्रिपाठी बताया गया है। उनकी इकाई ने उन्हें भुगतान के लिए 28 यात्रा भत्ता बिल और 10 बच्चों की शिक्षा भत्ता बिल रांची स्थित आरपीएओ में जमा करने के लिए भेजा था।
शिकायत के अनुसार, सुनील कुमार और माहतो ने भुगतान की प्रक्रिया और रिलीज के लिए 40,000 से 50,000 रुपये के बीच “अनुचित लाभ” की मांग की। सीबीआई का आरोप है कि अधिकारी वैध बकाया रोककर रिश्वत वसूलने की कोशिश कर रहे थे।
रांची कार्यालय में जाल
गुरुवार, 27 अगस्त को सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने आरपीएओ कार्यालय में जाल बिछाया। जांचकर्ताओं के अनुसार, तीनों आरोपियों को शिकायतकर्ता से 48,400 रुपये की मांग और स्वीकार करते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। पूरी रिश्वत की राशि बरामद कर ली गई।
सीबीआई के एक प्रवक्ता ने बयान में कहा, “जाल की कार्रवाई के दौरान 48,400 रुपये की रिश्वत राशि बरामद की गई।”
रांची और धनबाद में छापे
गिरफ्तारी के बाद सीबीआई की टीमों ने रांची और धनबाद में आरोपियों से जुड़े पांच स्थानों पर तलाशी ली। अधिकारियों के मुताबिक, तलाशी में डिजिटल उपकरण, संपत्ति खरीद से जुड़े दस्तावेज, निवेश, आभूषण और बैंक लेन-देन के कागजात के साथ-साथ नकदी की बड़ी राशि मिली।
झारखंड से आई मीडिया रिपोर्टों में, जिनकी आधिकारिक सीबीआई आंकड़ों से स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, कहा गया कि कई लाख रुपये नकद और आभूषण बरामद हुए, जिनमें सुजीत कुमार सिंह के धनबाद स्थित गांधी नगर, सब्जी बागान के आवास से भी बरामदगी शामिल थी। कुछ स्थानीय रिपोर्टों में नकद बरामदगी लगभग 10 से 22 लाख रुपये के बीच और आभूषण की कीमत इससे कहीं अधिक बताई गई। हालांकि सीबीआई के सार्वजनिक बयानों में अब तक केवल “नकदी की पर्याप्त राशि” जैसा सावधान शब्द प्रयोग किया गया है।
तीन दिन की सीबीआई हिरासत
तीनों अधिकारियों को शुक्रवार, 28 अगस्त को विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया गया। एजेंसी ने हिरासत में पूछताछ की मांग करते हुए कहा कि यह पता लगाना जरूरी है कि क्या अन्य अधिकारी भी इसमें शामिल थे। अदालत ने उन्हें तीन दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया। आगे की जांच जारी है।
यह मामला क्यों अहम है
यह प्रकरण इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह उस कार्यालय से जुड़ा है जो देशभर में तैनात सीआईएसएफ कर्मियों के वेतन, भत्ते और प्रतिपूर्ति के दावों का निपटारा करता है। यात्रा भत्ता और बच्चों की शिक्षा भत्ता केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के कर्मियों के नियमित अधिकार हैं। आरोप सही साबित होते हैं तो यह एक जवान के वैध बिलों के अंतिम निस्तारण चरण में अवैध लाभ की मांग की ओर इशारा करता है, जबकि वह कागजात आगे बढ़वाने के लिए दूसरे राज्य से आया था।
आरपीएओ की भूमिका परिचालन नहीं बल्कि प्रशासनिक और वित्तीय है। इसी कारण कथित मांग को संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि हवाई अड्डों, बिजली संयंत्रों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और अन्य महत्वपूर्ण ढांचों की सुरक्षा करने वाले कर्मी समय पर अपने यात्रा और परिवार से जुड़े दावों के निपटारे के लिए इसी कार्यालय पर निर्भर रहते हैं।
सीबीआई ने अभी यह नहीं कहा है कि कथित तौर पर यह प्रथा केवल इन्हीं बिलों तक सीमित थी या रांची कार्यालय में किसी व्यापक पैटर्न का हिस्सा थी। रिमांड आदेश जांचकर्ताओं को अन्य अधिकारियों की संभावित भूमिका की पड़ताल की भी अनुमति देता है।
आगे क्या होगा
आरोपी फिलहाल सीबीआई की हिरासत में पूछताछ का सामना कर रहे हैं। जांचकर्ता जब्त डिजिटल उपकरणों, संपत्ति और निवेश के कागजात, आभूषणों के रिकॉर्ड और बैंक लेन-देन की जांच कर रहे हैं। यदि आरोपपत्र दाखिल किया जाता है, तो उसमें सामान्यतः भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के प्रावधानों का उल्लेख होगा, जो 2018 में संशोधित हैं और लोक सेवकों द्वारा अनुचित लाभ की मांग व स्वीकृति से जुड़े हैं।
सीआईएसएफ या गृह मंत्रालय की ओर से विभागीय कार्रवाई पर तत्काल कोई आधिकारिक टिप्पणी सार्वजनिक रिपोर्टों में उपलब्ध नहीं थी। आगे की जांच जारी है।