थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ ने दक्षिणी कमान मुख्यालय का दौरा कर कमान की परिचालन तैयारियों और युद्ध क्षमता बढ़ाने के लिए चल रही पहलों की समीक्षा की।
दौरे के दौरान जनरल धीरज सेठ को दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर ने मौजूदा परिचालन वातावरण, तैयारियों की स्थिति, प्रशिक्षण पहलों और कमान की युद्ध क्षमता को और मजबूत करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।
थल सेनाध्यक्ष ने तेजी से बदलते युद्ध के स्वरूप के अनुरूप निरंतर परिचालन तत्परता और अनुकूलनशीलता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने तकनीक, रणनीति और प्रक्रियाओं के लगातार परिष्करण तथा उभरती प्रौद्योगिकियों को अधिक अपनाने की बात कही, ताकि परिचालन क्षमताएं वर्तमान और भविष्य के युद्धक्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप बनी रहें।
जनरल धीरज सेठ ने जटिल परिचालन परिस्थितियों के लिए सैनिकों को तैयार करने में यथार्थवादी और कठोर प्रशिक्षण के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने अधिक संयुक्तता और एकीकरण के साथ स्वदेशी क्षमता विकास में तेजी की जरूरत बताई, ताकि एक फुर्तीली, प्रौद्योगिकी-सक्षम और भविष्य के लिए तैयार भारतीय सेना का निर्माण हो सके।
थल सेनाध्यक्ष ने दक्षिणी कमान के सभी रैंकों की पेशेवर दक्षता, समर्पण और परिचालन तैयारी के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने सैनिकों से मिशन-केंद्रित बने रहने और कमान की परिचालन बढ़त बनाए रखने की दिशा में काम जारी रखने का आग्रह किया।
इस दौरे ने भारतीय सेना की क्षमता वृद्धि, प्रौद्योगिकी-संचालित अभियानों, यथार्थवादी प्रशिक्षण और आत्मनिर्भरता पर लगातार जोर को युद्ध तत्परता के प्रमुख स्तंभों के रूप में सामने रखा।