कोलकाता में 27 जुलाई को भारतीय सेना की जज एडवोकेट जनरल यानी जेएजी शाखा ने पूर्वी कमान के तत्वावधान में जेएजी विभागीय संगोष्ठी 2026 का सफल आयोजन किया। इसमें कमान के विभिन्न हिस्सों से आए वरिष्ठ विधि अधिकारियों ने सैन्य कानून के बदलते स्वरूप और आधुनिक सशस्त्र बलों के सामने खड़ी कानूनी चुनौतियों पर चर्चा की।
दो दिन तक चली इस संगोष्ठी में पूर्वी कमान के अधीन विभिन्न संरचनाओं से आए उप जज एडवोकेट जनरल ने विचारों का आदान-प्रदान किया, अपने अनुभव साझा किए और सैन्य अभियानों तथा प्रशासन से जुड़े कानूनी विकास पर मंथन किया। इसका केंद्रीय विषय था, “सैन्य कानून का विकास और आगे की कानूनी चुनौतियाँ।”
चर्चाओं में यह बात सामने आई कि भारतीय सेना को अपनी कानूनी व्यवस्था को तेजी से बदलती परिचालन वास्तविकताओं, प्रौद्योगिकीगत प्रगति और समकालीन न्यायशास्त्र के अनुरूप बनाए रखना है। प्रतिभागियों ने सैन्य न्याय, मानवाधिकार, साइबर अपराध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल साक्ष्य और अन्य उभरते कानूनी मुद्दों पर विस्तार से विचार किया, जो सैन्य क्षेत्र को लगातार प्रभावित कर रहे हैं।
सशस्त्र बलों द्वारा संचालन योजना और निर्णय प्रक्रिया में उन्नत प्रौद्योगिकियों के बढ़ते उपयोग के बीच सैन्य विधि विशेषज्ञों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। संगोष्ठी में इस पर भी चर्चा हुई कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल फॉरेंसिक उपकरण जांच, साक्ष्य संकलन और कानूनी प्रक्रियाओं को कैसे बदल रहे हैं, साथ ही इनके उपयोग से जुड़े कानूनी और नैतिक पहलुओं पर भी विचार किया गया।
साइबर अपराध और डिजिटल सुरक्षा भी विमर्श का प्रमुख विषय रहे। प्रतिभागियों ने सैन्य नेटवर्क और महत्वपूर्ण ढांचे को निशाना बनाने वाले साइबर खतरों के खिलाफ कानूनी तैयारी मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया। विचार-विमर्श में इस बात को रेखांकित किया गया कि तकनीक-आधारित सुरक्षा वातावरण में प्रभावी बने रहने के लिए कानूनी नीतियों और प्रक्रियाओं को निरंतर अद्यतन करना आवश्यक है।
इस अवसर पर लेफ्टिनेंट जनरल गम्भीर सिंह, चीफ ऑफ स्टाफ, मुख्यालय पूर्वी कमान, और मेजर जनरल बलेंदु सिंह नेगी, जज एडवोकेट जनरल, भारतीय सेना, उपस्थित रहे। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने एक मजबूत, अनुकूलनीय और भविष्य के लिए तैयार सैन्य न्याय प्रणाली की आवश्यकता पर जोर दिया, जो बदलते युद्ध स्वरूप तथा नई प्रौद्योगिकियों और सुरक्षा चुनौतियों से उत्पन्न कानूनी जटिलताओं का प्रभावी ढंग से सामना कर सके।
उनके संबोधन में सैन्य विधि अधिकारियों के निरंतर व्यावसायिक विकास की आवश्यकता को भी रेखांकित किया गया। साथ ही, जेएजी शाखा की उस अहम भूमिका पर प्रकाश डाला गया, जिसके तहत वह अनुशासन बनाए रखने, विधि के शासन को सुनिश्चित करने, संस्थागत अखंडता की रक्षा करने और कमांडरों को हर स्तर पर सही कानूनी मार्गदर्शन प्रदान करती है।
जेएजी विभागीय संगोष्ठी 2026 का सफल आयोजन भारतीय सेना की उस प्रतिबद्धता को भी दोहराता है, जिसके तहत वह निरंतर कानूनी शिक्षा, सामूहिक चर्चा और उभरते कानूनी मुद्दों के प्रति सक्रिय सहभागिता के माध्यम से अपनी सैन्य न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ कर रही है। समकालीन चुनौतियों पर संवाद को बढ़ावा देकर इस आयोजन ने एक आधुनिक और सशक्त कानूनी प्रणाली बनाए रखने के महत्व को भी रेखांकित किया, जो परिचालन प्रभावशीलता को समर्थन देने के साथ न्याय और उत्तरदायित्व के उच्चतम मानकों को बनाए रख सके।