लद्दाख प्रशासन ने एक अनूठी पहल के तहत भारतीय सेना, अर्धसैनिक बलों और लद्दाख स्काउट्स के 100 सेवानिवृत्त कर्मियों को नवगठित पर्यावरण संरक्षण बल के तहत तैनात किया है। इसका उद्देश्य केंद्रशासित प्रदेश की नाजुक पारिस्थितिकी की सुरक्षा करना है।
इस तैनाती को हाल ही में हुई कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें पंगोंग झील के पास पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में अवैध रूप से वाहन चलाने और तिब्बती गज़ेल का पीछा कर वन्यजीवों को परेशान करने के आरोप में चार पर्यटकों पर कुल 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
पर्यावरण संरक्षण बल लद्दाख के ऊंचाई वाले पारिस्थितिकी तंत्र, वन्यजीव आवासों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त करेगा। बल को पर्यावरण नियमों के उल्लंघन का पता लगाने, अवैध गतिविधियों को रोकने और दोषियों पर मौके पर ही चालान जारी करने का अधिकार दिया गया है।
यह बल अवैध ऑफ-रोड ड्राइविंग, कूड़ा फैलाने, प्रदूषण और ऐसी अन्य गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए गठित किया गया है, जो लद्दाख की अनोखी शीत मरुस्थलीय पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचाती हैं। संरक्षणकर्मियों ने लंबे समय से चेतावनी दी है कि अनियंत्रित ऑफ-रोड ड्राइविंग से नाजुक अल्पाइन वनस्पति को क्षति पहुंचती है, संकटग्रस्त वन्यजीव प्रभावित होते हैं और भू-दृश्य पर स्थायी निशान रह जाते हैं।
इस पहल की घोषणा करते हुए उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण बल पर्यावरण उल्लंघनों के खिलाफ एक मजबूत निवारक के रूप में काम करेगा और जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देगा। प्रशासन ने यह भी कहा कि सेवानिवृत्त सैनिकों को इस पहल में शामिल करने से उन्हें सेवा-निवृत्ति के बाद सार्थक रोजगार मिलेगा और उनकी अनुशासन तथा क्षेत्रीय अनुभव का उपयोग पर्यावरण प्रवर्तन को मजबूत करने में किया जा सकेगा।
यह पहल भारत के सबसे अधिक पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों में से एक में पर्यटन और पारिस्थितिक संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।