पुणे में 85 वर्षीय सेवानिवृत्त सेना अधिकारी से डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले में 12 लाख रुपये की ठगी की गई है। ठगों ने प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी बनकर उनसे कथित सत्यापन के नाम पर यह रकम ट्रांसफर करा ली। इस मामले में चिखली पुलिस ने बुधवार को मामला दर्ज किया।
शिकायत के अनुसार, अधिकारी को 1 सितंबर को एक अज्ञात नंबर से वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को प्रवर्तन निदेशालय का अधिकारी बताया और आरोप लगाया कि परेशान करने वाली कॉलें पीड़ित के नाम पर पंजीकृत एक मोबाइल नंबर से की गई थीं। उसने यह भी दावा किया कि अधिकारी के बैंक खाते से संदिग्ध लेनदेन हुए हैं और उन पर धन शोधन का आरोप लगाया।
निरीक्षक अमोल फडतरे ने द टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि कॉल करने वाले ने शिकायतकर्ता को गिरफ्तारी की धमकी दी और उनसे बैंक खाते की जानकारी साझा करने को मजबूर किया। इसके बाद अधिकारी को “सत्यापन” के लिए पैसा ट्रांसफर करने को कहा गया और आश्वासन दिया गया कि रकम वापस कर दी जाएगी। यह लेनदेन 1 से 5 सितंबर के बीच हुआ।
जब 12 लाख रुपये वापस नहीं मिले, तो सेवानिवृत्त अधिकारी ने उसी नंबर पर संपर्क किया। कॉल करने वाले ने और रकम की मांग की। धोखाधड़ी का संदेह होने पर पीड़ित पुलिस के पास पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई। जांच जारी है।
डिजिटल गिरफ्तारी घोटालों में आम तौर पर प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो या पुलिस जैसी एजेंसियों के अधिकारियों की पहचान का दुरुपयोग किया जाता है। कॉल करने वाले वीडियो कॉल, गिरफ्तारी की धमकी और धन शोधन या अन्य अपराधों के झूठे दावों के जरिए बुजुर्गों को अलग-थलग कर उनसे पैसे मंगवाते हैं। वास्तविक एजेंसियां सत्यापन के लिए पैसे नहीं मांगतीं और न ही नागरिकों को डिजिटल गिरफ्तारी में रखती हैं।
ऐसा कोई कॉल आने पर तुरंत फोन काट देना चाहिए, बैंक विवरण या ओटीपी साझा नहीं करने चाहिए और घटना की सूचना राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर देनी चाहिए। वरिष्ठ नागरिकों के परिवारजनों को भी अचानक होने वाले लेनदेन को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।