केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तराखंड पुलिस को राष्ट्रपति निशान प्रदान किया। देहरादून में शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को हुए समारोह में राज्य पुलिस को उसकी विशिष्ट सेवाओं, पेशेवर कार्यशैली और कर्तव्यनिष्ठा के लिए यह सम्मान दिया गया। उत्तराखंड यह सम्मान पाने वाला देश का 16वां राज्य बन गया है।
उत्तराखंड पुलिस के 25 वर्ष के सफर में मिले इस सम्मान के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और अन्य वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। समारोह में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, नागरिकों की सुरक्षा, प्राकृतिक आपदाओं से निपटने और सामरिक दृष्टि से अहम हिमालयी राज्य की सुरक्षा में पुलिस के योगदान को मान्यता दी गई।
शाह ने ड्यूटी के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले उत्तराखंड पुलिस के 206 कर्मियों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि नवंबर 2000 में राज्य के गठन के बाद से पुलिसकर्मियों की पीढ़ियों ने जिस समर्पण, अनुशासन और साहस से काम किया है, राष्ट्रपति निशान उसी का सम्मान है।

गृह मंत्री ने इसे पिछले 25 वर्षों में पुलिस बल को खड़ा करने में योगदान देने वाले सेवारत और सेवानिवृत्त अधिकारियों तथा जवानों के लिए गर्व का अवसर बताया। उन्होंने पुलिस के आदर्श वाक्य ‘कर्म सत्यम् शौर्यम्’ का उल्लेख करते हुए कहा कि बल ने इन मूल्यों को अपने कामकाज का आधार बनाया है। शाह के मुताबिक, इस दौरान पुलिसकर्मियों की संख्या करीब 13,000 से बढ़कर 26,000 से अधिक हो गई है और बल की अभियान संबंधी क्षमताएं भी मजबूत हुई हैं।
आपदा और बचाव अभियानों में भूमिका की सराहना
उत्तराखंड की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए शाह ने आपदा प्रबंधन और बचाव कार्यों में पुलिस की भूमिका की सराहना की। उन्होंने सिलक्यारा सुरंग बचाव अभियान को याद किया, जिसमें कई एजेंसियों के संयुक्त प्रयास से भीतर फंसे श्रमिकों को सुरक्षित निकाला गया था।
उन्होंने धराली, थराली, स्यानाचट्टी और मालदेवता में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान पुलिस के काम का भी उल्लेख किया। शाह ने कहा कि राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) सहित पुलिसकर्मी भूस्खलन, जंगलों की आग, बाढ़ और अन्य आपात स्थितियों में अक्सर अपनी जान जोखिम में डालकर काम करते हैं।
गृह मंत्री ने उत्तराखंड पुलिस और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के बीच तालमेल को भी अहम बताया। उन्होंने कहा कि दूरदराज के पहाड़ी इलाकों में सुरक्षाकर्मी अक्सर सबसे पहले मदद पहुंचाते हैं। उनकी तैयारी और साहस से स्थानीय लोगों, पर्यटकों और तीर्थयात्रियों का भरोसा बढ़ा है।
तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और सीमावर्ती गांवों पर जोर
शाह ने कहा कि पहाड़ी भूभाग, अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के कारण उत्तराखंड पुलिस की जिम्मेदारियां विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण हैं। बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री, हेमकुंड साहिब और कैंची धाम में हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। चारधाम यात्रा और कुंभ मेले जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था भी पुलिस संभालती है।
उन्होंने बढ़ती पर्यटक संख्या के बीच व्यवस्था संभालने और कठिन हिमालयी मार्गों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस की प्रशंसा की। साथ ही सीमावर्ती गांवों में बुनियादी ढांचे और रहन-सहन को बेहतर बनाने वाले वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम में बल के योगदान का उल्लेख किया।
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के साथ मिलकर उत्तराखंड पुलिस ने दूरस्थ सीमावर्ती बस्तियों से पलायन रोकने के प्रयासों में सहयोग किया है। शाह ने कहा कि कम से कम 50 गांवों में लोगों ने दोबारा बसना शुरू किया है।
डिजिटल पुलिसिंग में 93.46 अंक के साथ शीर्ष स्थान
गृह मंत्री ने नए आपराधिक कानूनों को लागू करने और आधुनिक जांच तकनीक अपनाने में उत्तराखंड पुलिस की प्रगति की भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि सीसीटीएनएस/आईसीजेएस 2.0 डैशबोर्ड पर राज्य पुलिस ने 93.46 अंक हासिल कर देश में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है।
राज्य में इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों के जरिए थानों, अदालतों, जेलों, फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं और अभियोजन एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत किया गया है। शाह ने जांच में फॉरेंसिक विज्ञान के इस्तेमाल और पुलिस प्रशासन के कंप्यूटरीकरण का उल्लेख करते हुए भरोसा जताया कि इन सुधारों से जांच और अदालती कार्यवाही में तेजी आएगी।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार का लक्ष्य मई 2027 के बाद दर्ज होने वाली एफआईआर से जुड़े मामलों में तीन वर्ष के भीतर दोषसिद्धि सुनिश्चित करना है। यह सरकार का घोषित लक्ष्य है, न कि पहले से हासिल परिणाम।
नशे के खिलाफ अभियान और सुरक्षा चुनौतियां
शाह ने कहा कि केंद्र सरकार ने 31 दिसंबर 2029 तक भारत को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है और संगठित मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई तेज की जा रही है। उन्होंने नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों और साइबर अपराध के खिलाफ उत्तराखंड पुलिस के प्रयासों की सराहना की। साथ ही विश्वास जताया कि समन्वित कार्रवाई और रोकथाम के उपायों से राज्य अगले तीन वर्षों में नशामुक्त होने का लक्ष्य हासिल कर सकता है।
नक्सल विरोधी अभियानों का जिक्र करते हुए उन्होंने राज्य पुलिस बलों और सीआरपीएफ, आईटीबीपी, बीएसएफ तथा एसएसबी सहित केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के योगदान को श्रेय दिया। शाह ने भारत के नक्सलवाद से मुक्त हो जाने का सरकार का दावा दोहराया, लेकिन उभरते खतरों के प्रति सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने की जरूरत भी बताई।
एवरेस्ट अभियान और खेलों में उपलब्धियां
गृह मंत्री ने नियमित पुलिस कार्यों से इतर उपलब्धियों के लिए भी उत्तराखंड पुलिस को बधाई दी। उन्होंने माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ाई करने वाला देश का पहला राज्य पुलिस संगठन बनने की उपलब्धि का उल्लेख किया।
शाह ने विश्व पुलिस एवं अग्निशमन खेलों में 37 पदक जीतने पर भी बल की सराहना की। उन्होंने गुजरात के गांधीनगर में होने वाले अगले संस्करण में और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए पुलिसकर्मियों को प्रोत्साहित किया।
राष्ट्रपति निशान, जिसे राष्ट्रपति पुलिस निशान भी कहा जाता है, पुलिस और अन्य वर्दीधारी संगठनों को विशिष्ट सेवा, अभियान संबंधी उपलब्धियों और पेशेवर उत्कृष्टता के लिए दिया जाने वाला प्रतिष्ठित औपचारिक सम्मान है। यह कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन, ईमानदारी और राष्ट्रसेवा का प्रतीक है।
अपने संबोधन के अंत में शाह ने विश्वास जताया कि यह सम्मान उत्तराखंड पुलिस का मनोबल बढ़ाएगा। उन्होंने उत्तराखंड और देश के लोगों को धनतेरस तथा दीपावली की शुभकामनाएं भी दीं।