हांगकांग में आयोजित 2026 वरिष्ठ विश्व तलवारबाजी चैंपियनशिप में भारतीय नौसेना की दो नाविकों ने भारतीय महिला एपे तलवारबाजी के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। मुख्य नाविक तनिक्शा खत्री और नाविक प्राची लोहान वरिष्ठ विश्व चैंपियनशिप के मुख्य 64 में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला एपे तलवारबाज बनीं।
एशियावर्ल्ड-एक्सपो में दुनिया की 180 से अधिक शीर्ष एपे तलवारबाजों के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करते हुए दोनों खिलाड़ियों ने धैर्य, तकनीकी दक्षता और जज्बे का शानदार प्रदर्शन किया। तनिक्शा ने 43वां स्थान हासिल किया, जबकि प्राची 58वें स्थान पर रहीं। उनकी इस ऐतिहासिक सफलता को भारतीय नौसेना, भारतीय तलवारबाजी संघ और खेल जगत ने भारत की अंतरराष्ट्रीय तलवारबाजी में प्रगति के एक बड़े पड़ाव के रूप में सराहा।
यह उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिभा का परिणाम नहीं है, बल्कि ओलंपिक और उभरते खेलों में खिलाड़ियों को तैयार करने में भारतीय सशस्त्र बलों की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाती है।
तनिक्शा खत्री का अंतरराष्ट्रीय सफलता तक का सफर
मुख्य नाविक तनिक्शा खत्री का जन्म 23 सितंबर 2003 को हरियाणा के करनाल में हुआ था। तलवारबाजी की ओर उनका झुकाव लगभग 2015 में तब शुरू हुआ, जब उन्होंने डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल के ग्रीष्मकालीन खेल शिविर में हिस्सा लिया। शुरुआत में वे फॉयल में खेलती थीं और अंडर-14 स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने जल्दी ही अपनी क्षमता साबित की।
इसके बाद कोचों की सलाह पर उन्होंने एपे अपनाया, और यही निर्णय आगे चलकर उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की दिशा तय करने वाला साबित हुआ। खेल उनके परिवार में भी रहा है। उनके पिता सोनू खत्री एक पुलिसकर्मी और पूर्व खिलाड़ी हैं, जिन्हें पीठ की चोट के कारण प्रतिस्पर्धी खेल छोड़ना पड़ा था।
पिता की खेल पृष्ठभूमि से प्रेरित होकर तनिक्शा ने कम उम्र से ही तलवारबाजी को समर्पित कर दिया और राष्ट्रीय स्तर पर लगातार आगे बढ़ती रहीं। उन्होंने मोहित अश्विनी और पूर्व विश्व चैंपियन नताली मोएलहाउज़ेन जैसे अनुभवी कोचों से प्रशिक्षण लिया। साथ ही फ्रांस में प्रशिक्षण कार्यक्रमों से भी उन्हें मूल्यवान अनुभव मिला।
वरिष्ठ विश्व मंच तक पहुंचने से पहले ही उनके नाम कई उपलब्धियां दर्ज हो चुकी थीं। तनिक्शा तीन बार जूनियर राष्ट्रीय चैंपियन बनीं और 2022 राष्ट्रमंडल जूनियर चैंपियनशिप में व्यक्तिगत तथा टीम रजत पदक जीते। उसी वर्ष उन्होंने ताशकंद में एशियाई जूनियर चैंपियनशिप में भारत के लिए टीम रजत पदक भी दिलाया।
उनकी सबसे बड़ी सफलताओं में से एक 2022 एशियाई खेलों में आई, जहां वे महिला एपे के क्वार्टरफाइनल तक पहुंचीं और उस समय तलवारबाजी में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत परिणाम दर्ज किया। हालांकि वे पेरिस 2024 ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने से थोड़ा चूक गईं, लेकिन उन्होंने अपनी अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग सुधारने और लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक चक्र की तैयारी पर ध्यान बनाए रखा।
2026 विश्व चैंपियनशिप में तनिक्शा ने वरिष्ठ स्तर पर किसी भारतीय तलवारबाज का एक बेहतरीन प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने छह पूल मुकाबलों में से पांच जीते और अपने समूह में पहला स्थान हासिल कर मुख्य 64 के लिए सीधे क्वालिफाई किया। मुख्य 64 में उनका सामना जापान की रिन किशिमोटो से हुआ, जहां वे 12-15 से हार गईं। इसके बावजूद 43वां स्थान भारतीय महिला एपे में वरिष्ठ विश्व चैंपियनशिप का अब तक का सर्वोच्च परिणाम बन गया।
प्राची लोहान का विश्व मंच तक पहुंचने का सफर
नाविक प्राची लोहान तेजी से भारत की सबसे होनहार युवा तलवारबाजों में शामिल हुई हैं। हरियाणा के जिंद क्षेत्र से जुड़ी प्राची ने कक्षा 7 में पढ़ाई के दौरान जिंद के इंडस पब्लिक स्कूल में खेल गतिविधियों के माध्यम से तलवारबाजी शुरू की।
भारतीय नौसेना उनके परिवार की कहानी का भी हिस्सा रही है। उनके पिता भारतीय नौसेना में मुख्य नाविक रहे हैं और सेवानिवृत्त हो चुके हैं। प्राची ने सैन्य सेवा और शीर्ष खेल प्रदर्शन को साथ जोड़कर इस परंपरा को आगे बढ़ाया।
2022 एशियाई जूनियर और कैडेट तलवारबाजी चैंपियनशिप में ताशकंद में कैडेट महिला एपे वर्ग में कांस्य पदक जीतने के बाद उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। घरेलू सर्किट में उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया और 2023 की 33वीं वरिष्ठ राष्ट्रीय तलवारबाजी चैंपियनशिप में उन्होंने खिताब जीता।
उस रोमांचक फाइनल में उन्होंने तनिक्शा खत्री को 15-14 से हराकर राष्ट्रीय खिताब अपने नाम किया। हांगकांग विश्व चैंपियनशिप में प्राची ने उल्लेखनीय जुझारूपन दिखाया। पूल में चौथा स्थान हासिल करने के बाद उन्होंने प्रारंभिक नॉकआउट दौर में प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़ना जारी रखा।
उनकी यात्रा का एक प्रमुख क्षण चीन की यांग जिंगवेन पर 15-14 की जीत रहा, जो प्रतियोगिता में विश्व की 25वीं रैंकिंग और चीन की शीर्ष तलवारबाज थीं। इसके बाद मुख्य 64 में उनका सामना इटली की जूलिया रिज़ी से हुआ, जो विश्व की प्रमुख एपे तलवारबाजों में शामिल हैं और इटली की ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता टीम की सदस्य भी रही हैं।
प्राची ने अनुभवी इतालवी खिलाड़ी को कड़ी टक्कर दी, लेकिन 14-15 से बहुत मामूली अंतर से हार गईं। उन्होंने प्रतियोगिता 58वें स्थान पर समाप्त की और अपनी नौसेना की साथी के साथ मुख्य 64 तक पहुंचने वाली केवल दूसरी भारतीय महिला बनीं।
भारतीय तलवारबाजी के लिए ऐतिहासिक क्षण
वरिष्ठ विश्व तलवारबाजी चैंपियनशिप ओलंपिक खेलों के बाहर अंतरराष्ट्रीय तलवारबाजी का सर्वोच्च स्तर मानी जाती है। मुख्य 64 में जगह बनाना एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि इसके लिए खिलाड़ियों को दुनिया के सबसे मजबूत तलवारबाजों के खिलाफ बेहद प्रतिस्पर्धी पूल चरणों और प्रारंभिक नॉकआउट दौरों से गुजरना पड़ता है।
भारतीय महिला एपे के लिए इससे पहले कोई भी खिलाड़ी वरिष्ठ विश्व चैंपियनशिप में इस स्तर तक नहीं पहुंची थी। ऐसे में तनिक्शा खत्री और प्राची लोहान की एक साथ क्वालिफिकेशन भारतीय तलवारबाजी के इतिहास का निर्णायक क्षण बन गई।
भारतीय तलवारबाजी संघ और एशियाई तलवारबाजी परिसंघ के महासचिव राजीव मेहता ने इस उपलब्धि को भारतीय तलवारबाजी के लिए एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि यह दोनों खिलाड़ियों की असाधारण प्रतिभा, समर्पण और धैर्य को दर्शाता है तथा वैश्विक मंच पर भारतीय तलवारबाजी के लगातार बेहतर होते स्तर को भी सामने लाता है।
भारतीय नौसेना ने भी दोनों नाविकों को बधाई दी और उनकी सफलता को सेवा और राष्ट्र दोनों के लिए गर्व का विषय बताया। उनके प्रदर्शन ने खेलों के विभिन्न क्षेत्रों में शीर्ष खिलाड़ियों को सहयोग देने की नौसेना की बढ़ती प्रतिष्ठा को और मजबूत किया है।
आगे की राह
मुख्य नाविक तनिक्शा खत्री और नाविक प्राची लोहान के प्रदर्शन ने अंतरराष्ट्रीय तलवारबाजी में भारत की स्थिति को काफी मजबूत किया है। विश्व रैंकिंग के मूल्यवान अंक मिलने के साथ-साथ उन्होंने ओलंपिक पदक विजेताओं और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ एपे तलवारबाजों के खिलाफ मुकाबले का अमूल्य अनुभव भी हासिल किया है।
2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक खेलों की तैयारी के बीच दोनों खिलाड़ियों से भारत की तलवारबाजी योजना में अग्रणी भूमिका निभाने की उम्मीद है। हांगकांग में मिली इस सफलता ने यह नया भरोसा दिया है कि भारतीय तलवारबाज लगातार दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों से मुकाबला कर सकते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उनकी उपलब्धि देशभर के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनी है। उनका सफर दिखाता है कि समर्पण, अनुशासित प्रशिक्षण और भारतीय नौसेना जैसी संस्थाओं के सहयोग से प्रतिभा को ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों में बदला जा सकता है।
तनिक्शा खत्री और प्राची लोहान ने न केवल भारत के रिकॉर्ड नए सिरे से लिखे हैं, बल्कि भारतीय तलवारबाजी के लिए एक नया अध्याय भी खोला है। उन्होंने साबित किया है कि देश वैश्विक मंच पर एक प्रतिस्पर्धी शक्ति के रूप में लगातार उभर रहा है।