पश्चिमी कमान मुख्यालय में आयोजित वार्षिक उड़ान सुरक्षा सम्मेलन में सेना विमानन के भीतर उड़ान सुरक्षा प्रथाओं, संचालन अनुशासन और दुर्घटना-रोधक उपायों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
इस सम्मेलन की अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल एच एस साही, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वाईएसएम, एसएम, मुख्य स्टाफ अधिकारी, पश्चिमी कमान मुख्यालय ने की। इसमें सेना विमानन के पेशेवरों ने सुरक्षा और संचालन दक्षता बढ़ाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया।
चर्चाओं में पूर्वसक्रिय जोखिम प्रबंधन पर जोर दिया गया और इस आवश्यकता को रेखांकित किया गया कि संभावित खतरों की पहचान कर उन्हें किसी भी संचालन घटना में बदलने से पहले ही दूर किया जाए। प्रतिभागियों ने उच्च स्तर के अनुशासन और निर्धारित विमानन प्रक्रियाओं के पालन को भी महत्वपूर्ण बताया।
सेना विमानन के महानिदेशक और कर्नल कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल विनोद नाम्बियार, एसएम ने विमानन अभियानों में व्यावसायिक दक्षता और बिना समझौते वाले मानकों के महत्व को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि एक सशक्त और पूर्वसक्रिय सुरक्षा संस्कृति, परिचालन प्रभावशीलता बनाए रखने के साथ-साथ वायु चालक दल, विमानन कर्मियों और मूल्यवान सैन्य संपत्तियों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।
यह सम्मेलन विमानन पेशेवरों के लिए अनुभवों का आदान-प्रदान करने, संचालन संबंधी चुनौतियों की समीक्षा करने और उड़ान सुरक्षा तथा जोखिम न्यूनीकरण में सर्वोत्तम तरीकों को और मजबूत करने का मंच बना।
विचार-विमर्श में यह भी बताया गया कि उड़ान सुरक्षा केवल एक तकनीकी आवश्यकता नहीं, बल्कि युद्ध तत्परता और युद्धक क्षमता का अभिन्न हिस्सा है।
सम्मेलन ने सेना विमानन में सुरक्षित, प्रभावी और मिशन-उन्मुख अभियानों को बनाए रखने तथा पेशेवर मानकों और सुरक्षा की संस्कृति को निरंतर मजबूत करने के प्रति भारतीय सेना की प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की।