एयर फोर्स फैमिली वेलफेयर एसोसिएशन (क्षेत्रीय), मुख्यालय प्रशिक्षण कमान ने 17 अगस्त 2026 को संगिनियों के लिए एक उपयोगी वर्चुअल सत्र का आयोजन किया। इसमें आत्म-देखभाल, पालन-पोषण, किशोरों के प्रबंधन और तेजी से बदलते डिजिटल परिवेश से उत्पन्न चुनौतियों पर चर्चा की गई।
यह सत्र ग्रुप कैप्टन तुषार अग्रवाल, वीएसएम, प्रमुख संकाय, नेतृत्व प्रशिक्षण एवं व्यवहार विज्ञान केंद्र (सी-एलएबीएस), वायु सेना प्रशासनिक महाविद्यालय, कोयम्बटूर द्वारा लिया गया। कार्यक्रम में AFFWA (क्षेत्रीय), प्रशिक्षण कमान के कार्यक्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से संगिनियों ने वर्चुअल माध्यम से भाग लिया।
सत्र में श्रीमती सुनीता श्रीनिवास, अध्यक्ष, AFFWA (क्षेत्रीय), मुख्यालय प्रशिक्षण कमान भी उपस्थित रहीं। इस पहल ने प्रतिभागियों को परिवारों को प्रभावित करने वाले कई मुद्दों पर चर्चा का अवसर दिया, विशेष रूप से व्यक्तिगत कल्याण, पालन-पोषण और बच्चों तथा किशोरों के बदलते सामाजिक परिवेश से जुड़े विषयों पर।
चर्चा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा संगिनियों के सामने आने वाली चुनौतियों और आत्म-देखभाल तथा आत्म-उपेक्षा के बीच अंतर को समझने की आवश्यकता पर केंद्रित रहा। सत्र में यह भी बताया गया कि कई बार गहराई से जमी हुई मानसिक धारणाओं को पहचानकर उन्हें छोड़ना जरूरी होता है, क्योंकि वे व्यक्ति को अपने भावनात्मक और व्यक्तिगत कल्याण को प्राथमिकता देने से रोक सकती हैं।
विश्वसनीय सहायक तंत्र विकसित करने को भी बातचीत का अहम विषय बनाया गया। प्रतिभागियों को परिवारिक जीवन की अनेक जिम्मेदारियों को संभालते समय संवाद, सामुदायिक सहयोग और स्वस्थ पारस्परिक संबंधों के महत्व को समझने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
सत्र में पालन-पोषण और किशोर प्रबंधन पर भी विस्तार से चर्चा हुई, खासकर जनरेशन ज़ेड और उस तेजी से बदलते माहौल के संदर्भ में जिसमें युवा बड़े हो रहे हैं। स्मार्टफोन, सोशल मीडिया मंचों और डिजिटल सामग्री के बढ़ते प्रभाव के बीच आज के माता-पिता को पहले की पीढ़ियों की तुलना में अलग तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रुप कैप्टन तुषार अग्रवाल ने युवा मन पर इंटरनेट और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित किया तथा यह बताया कि ऑनलाइन व्यक्तित्व और प्रभावशाली लोग किस तरह दृष्टिकोण, आकांक्षाओं और व्यवहार को आकार दे सकते हैं। चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि माता-पिता को अपने बच्चों के डिजिटल परिवेश के प्रति जागरूक रहना चाहिए, न कि ऑनलाइन गतिविधि को उनके समग्र विकास से अलग मानना चाहिए।
कार्यक्रम में बच्चों को जिम्मेदार और सूचित डिजिटल उपयोग की ओर मार्गदर्शन देने की आवश्यकता पर बल दिया गया। जब युवा ऑनलाइन सूचना, विचारों और प्रवृत्तियों की बड़ी मात्रा से गुजरते हैं, तब अभिभावकीय मार्गदर्शन और खुला संवाद उन्हें डिजिटल सामग्री को सोच-समझकर परखने और स्वस्थ ऑनलाइन आदतें विकसित करने में मदद कर सकता है।
बदलते डिजिटल परिदृश्य को केवल प्रतिबंधों के दृष्टिकोण से देखने के बजाय, सत्र ने उस परिवेश को समझने के महत्व को सामने रखा जिसमें आज के किशोर संवाद करते हैं, सीखते हैं और अपनी राय बनाते हैं। ऐसी समझ माता-पिता को बच्चों के साथ बेहतर संवाद बनाए रखने और अत्यधिक या अनुचित डिजिटल संपर्क से जुड़े जोखिमों तथा दबावों को संभालने में मदद कर सकती है।
मुख्य सत्र के बाद प्रश्नोत्तर का एक संवादात्मक दौर भी हुआ, जिसमें संगिनियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने कई प्रासंगिक प्रश्न उठाए, अपनी चिंताओं पर चर्चा की और अपने व्यक्तिगत तथा पारिवारिक जीवन में आने वाली परिस्थितियों पर स्पष्टीकरण मांगा।
इस संवाद से प्रतिभागियों को व्यावहारिक समझ और उपयोगी निष्कर्ष मिले, जो उनके साथ-साथ उनके बच्चों से जुड़ी चुनौतियों से निपटने में सहायक होंगे। यह चर्चा ऐसे समय में विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही जब तकनीकी और सामाजिक बदलाव पारिवारिक संबंधों, पालन-पोषण की प्रक्रियाओं और किशोर व्यवहार को तेजी से बदल रहे हैं।
AFFWA (क्षेत्रीय), मुख्यालय प्रशिक्षण कमान की यह पहल वायु सेना परिवारों के कल्याण और सशक्तीकरण पर उसके निरंतर ध्यान को दर्शाती है। कमान के विभिन्न क्षेत्रों से संगिनियों की सक्रिय भागीदारी और विशेषज्ञता को एक साथ लाकर यह सत्र समकालीन चुनौतियों पर चर्चा और आज की तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया को समझने के लिए एक सार्थक मंच बना।