एयर मार्शल तरुण चौधरी, एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (एओसी-इन-सी), केंद्रीय वायु कमान ने कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट (सीडीएम), एकीकृत रक्षा स्टाफ में एचडीएमसी-22 के प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए “भविष्य के युद्ध” की बदलती प्रकृति पर प्रकाश डाला।
अपने संबोधन में एयर मार्शल चौधरी ने बताया कि तीव्र तकनीकी प्रगति, तीनों सेनाओं के बीच बढ़ती संयुक्तता और उभरती साझेदारियां आधुनिक संघर्ष की प्रकृति को किस तरह बदल रही हैं।
उन्होंने “प्रौद्योगिकी के लोकतंत्रीकरण” पर विशेष जोर दिया, जिसके कारण उन्नत क्षमताएं अब अधिक व्यापक रूप से उपलब्ध हो रही हैं और सैन्य अभियानों की योजना तथा संचालन का तरीका बदल रहा है। इसी संदर्भ में उन्होंने प्रभावी बहु-क्षेत्रीय अभियानों के लिए विभिन्न परिचालन क्षेत्रों में क्षमताओं के सहज एकीकरण के महत्व को रेखांकित किया।
एयर मार्शल ने यह भी कहा कि प्रौद्योगिकीगत विकास के साथ कदम मिलाना अब सैन्य नेतृत्व के लिए विकल्प नहीं रह गया है। उभरती प्रौद्योगिकियों से लगातार अवगत रहना और उनके परिचालन प्रभावों को समझना, जटिल होते सुरक्षा परिवेश में नेतृत्व की एक मूल आवश्यकता बन चुका है।
देश के रक्षा उद्योग की भूमिका को रेखांकित करते हुए एयर मार्शल चौधरी ने सैन्य उपयोगकर्ताओं और उद्योग के बीच अधिक समन्वय का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि निकट सहयोग ऐसे समाधान विकसित करने के लिए आवश्यक है जो परिचालन की दृष्टि से प्रासंगिक, विस्तार योग्य और सशस्त्र बलों की बदलती आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम हों।
अपने संबोधन में उन्होंने तकनीक, संयुक्तता, उद्योग सहयोग और दूरदर्शी सैन्य नेतृत्व को मिलाकर भारत की सशस्त्र सेनाओं को भविष्य के युद्ध की चुनौतियों के लिए तैयार करने के महत्व पर जोर दिया।