भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कोर ने नगरोटा में इनो-योद्धा I3R&D प्रतियोगिता 2026-27 का सफल आयोजन किया। इस मंच पर वर्दीधारी युवा नवप्रवर्तकों को अपनी स्वदेशी तकनीकों को प्रदर्शित करने का अवसर मिला, जिनका उद्देश्य उभरती हुई परिचालन चुनौतियों का समाधान करना है।
इस प्रतियोगिता में आधुनिक युद्ध से जुड़े कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों के नवाचारी प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए गए। इनमें मानवरहित हवाई प्रणालियाँ, प्रतिमानवरहित हवाई तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्वायत्त प्रणालियाँ और स्टील्थ तकनीक शामिल थीं।
सेना के युवा नवप्रवर्तकों ने ऐसे समाधान पेश किए, जिनका लक्ष्य परिचालन प्रभावशीलता को बढ़ाना और बाहरी स्रोतों पर निर्भरता को कम करना है। इस पहल ने उस बढ़ते जोर को भी रेखांकित किया, जिसके तहत सैनिकों और संरचनाओं की सीधी जरूरतों के आधार पर व्यावहारिक और स्वदेशी समाधान विकसित किए जा रहे हैं।
व्हाइट नाइट कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग ने कार्यक्रम के दौरान भाग लेने वाली टीमों से बातचीत की और प्रतियोगिता में प्रदर्शित तकनीकों तथा अवधारणाओं का अवलोकन किया।
उन्होंने प्रतिभागियों की सूझबूझ, मेहनत और नवाचार की भावना की सराहना की। उनके अनुसार, ये समाधान मैदान में तैनात सैनिकों के सामने आने वाली परिचालन चुनौतियों से निपटने में सक्षम हो सकते हैं।
इनो-योद्धा पहल सैनिकों और अधिकारियों को उनके परिचालन अनुभव को तकनीकी समाधानों में बदलने के लिए प्रोत्साहित करती है। यह विशेष रूप से उन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है, जहां तेजी से विकसित हो रही तकनीकें युद्ध के स्वरूप को बदल रही हैं।
यह प्रतियोगिता भारतीय सेना के नवाचार और स्वदेशीकरण पर केंद्रित रुख को भी मजबूती देती है। इसके माध्यम से उभरती तकनीकों को परिचालन भूमिकाओं में शामिल करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
व्हाइट नाइट कोर का उद्देश्य वर्दीधारी युवा नवप्रवर्तकों को मानवरहित हवाई प्रणालियाँ, प्रतिमानवरहित हवाई तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वायत्त मंचों और स्टील्थ तकनीकों पर समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित करना है, ताकि युद्धक्षेत्र की जरूरतों को स्वदेशी क्षमताओं में बदला जा सके।
यह पहल आत्मनिर्भर भारत की व्यापक सोच के अनुरूप है। इसका मकसद देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना और सशस्त्र बलों के भीतर अधिक तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।