नई दिल्ली, 28 जुलाई: सेना विधि महाविद्यालय, पुणे के 46 विद्यार्थियों और तीन संकाय सदस्यों के एक प्रतिनिधिमंडल ने 27 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली स्थित सैन्य विधि संस्थान का दौरा किया। यह शैक्षणिक पहल भावी विधि पेशेवरों को सैन्य न्याय व्यवस्था और भारतीय सेना की विधिक संरचना से परिचित कराने के उद्देश्य से की गई थी।
दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल को सैन्य विधि संस्थान के कार्यकरण, जज एडवोकेट जनरल शाखा की भूमिका और जिम्मेदारियों, तथा भारतीय सेना में उपलब्ध विविध विधिक करियर अवसरों पर विस्तृत जानकारी दी गई। संवाद सत्रों में विद्यार्थियों को सशस्त्र बलों के उस विशिष्ट विधिक परिवेश की समझ मिली, जहां सैन्य कानून देश की नागरिक न्याय प्रणाली के साथ-साथ कार्य करता है।
संस्थान के अधिकारियों ने बताया कि जज एडवोकेट जनरल शाखा सैन्य कमांडरों को विधिक मामलों पर सलाह देने, सैन्य न्याय व्यवस्था का संचालन करने, सैन्य कानूनों और विनियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने तथा अनुशासनात्मक और अभियान संबंधी विधिक प्रक्रियाओं में सहायता करने में अहम भूमिका निभाती है। विद्यार्थियों को सैन्य विधि अधिकारियों की पेशेवर जिम्मेदारियों और जज एडवोकेट जनरल शाखा में अधिकारी के रूप में भारतीय सेना में शामिल होने के मार्गों से भी अवगत कराया गया।
शैक्षणिक दौरे के तहत प्रतिनिधिमंडल को संस्थान की आधुनिक प्रशिक्षण अवसंरचना का भी भ्रमण कराया गया। इस दौरान ब्रिगेडियर जस्टिस डी.एम. सेन पुस्तकालय विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जहां विधिक साहित्य, सैन्य कानून संबंधी संदर्भ सामग्री और शोध सामग्री का व्यापक संग्रह उपलब्ध है। यह संग्रह सैन्य विधि पेशेवरों के प्रशिक्षण में सहायक है।
प्रतिनिधिमंडल ने मूट कोर्ट कोर्ट मार्शल हॉल का भी दौरा किया, जहां विद्यार्थियों को सैन्य न्याय व्यवस्था की प्रक्रियाओं, प्रथाओं और सूक्ष्मताओं की जानकारी दी गई। यह सुविधा यथार्थपरक न्यायालयीन अभ्यास का वातावरण उपलब्ध कराती है, जिससे अधिकारियों को कोर्ट मार्शल कार्यवाहियों और अन्य सैन्य विधिक प्रक्रियाओं के संचालन का प्रशिक्षण मिलता है।
सैन्य विधि संस्थान भारत में सैन्य विधिक शिक्षा का प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान है। यह जज एडवोकेट जनरल शाखा के अधिकारियों और अन्य सैन्य कर्मियों को परिचालन विधि, सैन्य न्याय, अंतरराष्ट्रीय मानवीय विधि, प्रशासनिक विधि और सशस्त्र बलों के संचालन के लिए आवश्यक अन्य विशिष्ट क्षेत्रों में तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सेना विधि महाविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए यह दौरा शैक्षणिक विधिक अध्ययन और सैन्य कानून के व्यावहारिक प्रयोग के बीच सेतु बनाने का अवसर बना। अनुभवी अधिकारियों और विधि विशेषज्ञों के साथ संवाद ने उन्हें सैन्य अभियानों और प्रशासन को विधिक सहायता देने से जुड़ी विशिष्ट चुनौतियों और जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद की।
ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम अकादमिक संस्थानों और सशस्त्र बलों के बीच संबंधों को मजबूत करते हैं तथा भावी विधि पेशेवरों में सैन्य विधिक करियर के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं। ये अनुशासन, न्याय और विधि के शासन के उन सिद्धांतों की गहरी समझ विकसित करने में भी योगदान देते हैं, जो भारतीय सेना के कार्यकरण की आधारशिला हैं।
दौरे का समापन इस भावना के साथ हुआ कि विद्यार्थियों ने सैन्य न्याय व्यवस्था और सशस्त्र बलों में विधिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण के देश के प्रमुख संस्थानों में से एक के कार्यकरण को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर मिलने पर आभार व्यक्त किया।