केरल पुलिस ने 32 वर्षीय एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है, जिसे बांग्लादेशी नागरिक बताया गया है। वह एझिमाला में पय्यान्नूर के पास स्थित भारतीय नौसेना अकादमी में संविदा कर्मचारी के रूप में काम कर रहा था। यह कार्रवाई शुक्रवार, 18 सितंबर को की गई।
यह अकादमी भारतीय नौसेना की प्रमुख अधिकारी-प्रशिक्षण संस्था है। जिले में लगभग चार दिनों के भीतर बांग्लादेशी नागरिक की यह छठी गिरफ्तारी है, जिसके बाद संवेदनशील रक्षा प्रतिष्ठान में संविदा कर्मियों की पहचान जांच को लेकर सवाल उठे हैं।
पुलिस और स्थानीय रिपोर्टों में व्यक्ति की पहचान बिप्लब सोरेन या बिपलोब सोरेन के रूप में की गई है। द हिंदू के अनुसार, पुलिस ने उसे पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद स्थित नबाग्राम निवासी अनिल सोरेन का पुत्र बताया है। कन्नूर जिला ग्रामीण पुलिस प्रमुख उमेश गोयल ने कहा कि जांचकर्ता अभी इस नाम की सत्यता की पुष्टि नहीं कर पाए हैं और हिरासत में लेने के बाद आगे जांच की जाएगी।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वह लगभग एक वर्ष से अकादमी के कपड़े धोने वाले अनुभाग में अस्थायी या संविदा कर्मचारी के तौर पर काम कर रहा था और खुद को भारतीय नागरिक बताता था। रिपोर्टों में कहा गया है कि उसके पास वैध यात्रा दस्तावेज या वीजा नहीं था। जांचकर्ताओं को बिप्लब या बिपलोब सोरेन के नाम का एक कथित जाली आधार कार्ड और पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद पुलिस की ओर से जारी बताया गया पुलिस सत्यापन प्रमाणपत्र मिला है। पूछताछ के दौरान उसके मोबाइल फोन से मिले दस्तावेज और अन्य सामग्री से बांग्लादेशी नागरिकता के संकेत मिले, अधिकारियों ने कई माध्यमों को बताया।
नौसेना अधिकारियों को उसके व्यवहार पर संदेह हुआ, जिसके बाद उस पर निगरानी रखी गई और शुक्रवार सुबह उससे पूछताछ की गई। सत्यापन के बाद उसे करीब 8:15 बजे रात पय्यान्नूर पुलिस के हवाले कर दिया गया। पय्यान्नूर के उपनिरीक्षक शुहैब ने सर्किल इंस्पेक्टर महेश के. नायर के निर्देश पर गिरफ्तारी की। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि हिरासत से पहले खुफिया इनपुट मिले थे। संपर्क किए जाने पर भारतीय नौसेना अकादमी के अधिकारियों ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
पुलिस ने अब तक यह सार्वजनिक नहीं किया है कि उसे किस ठेकेदार या एजेंसी के माध्यम से रखा गया था, और न ही यह कहा है कि उसकी मौजूदगी किसी पुष्टि-शुदा सुरक्षा खतरे के बराबर थी। जांचकर्ता यह पता लगा रहे हैं कि उसे जाली कागजात कैसे मिले, उसने परिसर के भीतर रोजगार कैसे हासिल किया और क्या उच्च-सुरक्षा स्थल पर काम के लिए आवश्यक पृष्ठभूमि जांच की गई थी। अब तक जासूसी का कोई आधिकारिक निष्कर्ष घोषित नहीं किया गया है। मामला अभी जांचाधीन है।
कन्नूर में जुड़ी गिरफ्तारियां
एझिमाला की यह हिरासत उसी जिले में दर्ज मामलों की एक कड़ी के बाद हुई है। पिछले कुछ दिनों में कन्नूर पुलिस ने पांच बांग्लादेशी महिलाओं को गिरफ्तार किया, जिन पर भारत में बिना वैध दस्तावेजों के रहने और काम करने का आरोप है।
इनमें से एक, फरिदपुर, बांग्लादेश की सलीना या सलीना अख्तर, को सबसे पहले कन्नूर रेलवे स्टेशन के पास एक स्पा से खुफिया सूचना के आधार पर हिरासत में लिया गया। बाद में नजमा अख्तर, 40; तसलीमा खातून, 25; मोयना खातून, 29; और नसरी बीबी या नसरीन बिबी, 28 को अदालत की अनुमति से की गई तलाशी के बाद ओडेनपारम्बु स्थित किराये के आवास से पकड़ा गया। पुलिस ने बांग्लादेशी पहचान पत्र और कथित जाली भारतीय दस्तावेज बरामद किए। अधिकारियों ने कहा कि महिलाओं ने शहर के स्पा प्रतिष्ठानों में काम किया था और पूछताछ में उन्होंने बताया कि केरल जाने से पहले कुछ दस्तावेज असम में हासिल किए गए थे। इन मामलों में आप्रवासन और विदेशी अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किए गए।
अब भी अनसुलझे सवाल
चार दिनों में छह हिरासतों की यह कड़ी कन्नूर में प्रवासी और संविदा श्रम की पहचान जांच पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिसमें रक्षा से जुड़े स्थल भी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि वह यह पता लगा रही है कि पहचान दस्तावेज कैसे प्राप्त किए गए और क्या बिचौलियों ने आवाजाही, ठहरने और नौकरी की व्यवस्था की।
एझिमाला में हिरासत में लिया गया व्यक्ति मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जा सकता है। नौसेना और कन्नूर पुलिस की ओर से आने वाले आगे के आधिकारिक बयान यह तय करेंगे कि आरोपों की प्रकृति क्या होगी और क्या जांच अवैध रूप से रहने तथा जाली पहचान पत्रों के उपयोग से आगे बढ़ेगी।