जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक महेंद्र नाथ (एम.एन.) सभरवाल का शनिवार को कानपुर में लंबी और उल्लेखनीय सेवा के बाद निधन हो गया। उनके निधन से देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाने वाले एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का जाना हुआ है।
सभरवाल जम्मू-कश्मीर कैडर के 1964 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी थे। वे अक्टूबर 1993 से फरवरी 1997 तक जम्मू-कश्मीर पुलिस के पुलिस महानिदेशक रहे। उनका कार्यकाल उस दौर में रहा, जब क्षेत्र में आतंकवाद से निपटने और स्थिति को स्थिर करने के लिए सुरक्षा बल लगातार प्रयास कर रहे थे।
वे जम्मू-कश्मीर के सातवें पुलिस महानिदेशक थे और उनके कार्यकाल में लिए गए कई संस्थागत कदमों के लिए उन्हें याद किया जाता है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण कदम 1994 में विशेष कार्य बल की स्थापना थी, जो जम्मू-कश्मीर पुलिस का पहला समर्पित आतंकवाद-रोधी दस्ता बना।
विशेष कार्य बल का गठन राज्य पुलिस के भीतर आतंकवाद से निपटने की विशेष क्षमता विकसित करने की दिशा में एक अहम कदम माना गया। इस पहल से पुलिस की लक्षित आतंकवाद-रोधी कार्रवाइयों की क्षमता बढ़ी और जम्मू-कश्मीर की विशेष सुरक्षा प्रतिक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिली।
जम्मू-कश्मीर पुलिस प्रमुख के रूप में कार्यकाल पूरा करने के बाद सभरवाल ने देश की व्यापक सुरक्षा व्यवस्था में कई वरिष्ठ पदों पर जिम्मेदारी निभाई। उन्हें दिसंबर 1997 में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के महानिदेशक के रूप में नियुक्त किया गया और वे जुलाई 2000 तक इस पद पर रहे।
सीआरपीएफ प्रमुख के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान संगठनात्मक सुधारों के साथ-साथ कर्मियों के कल्याण और कार्य स्थितियों को बेहतर बनाने के लिए भी कदम उठाए गए। जम्मू-कश्मीर में उनके अनुभव और आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों की समझ ने देश के सबसे बड़े केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल को मजबूत करने के उनके दृष्टिकोण को दिशा दी।
इसके बाद वे खुफिया ब्यूरो के विशेष निदेशक रहे, जहां उन्होंने आंतरिक सुरक्षा और खुफिया से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्व संभाले। पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और खुफिया तंत्र में उनके अनुभव ने उन्हें भारत की सुरक्षा चुनौतियों की व्यापक समझ दी।
करियर के बाद के हिस्से में उन्होंने भारत सरकार में सुरक्षा सचिव के रूप में भी सेवा दी। इस भूमिका में वे राष्ट्रीय सुरक्षा और अति विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा से जुड़े मामलों से जुड़े रहे, जिससे वे देश की कुछ सबसे संवेदनशील सुरक्षा जिम्मेदारियों के केंद्र में रहे।
उनका करियर भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में कई दशकों के महत्वपूर्ण बदलावों का साक्षी रहा। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से मुकाबले से लेकर सीआरपीएफ का नेतृत्व करने और खुफिया तथा राष्ट्रीय सुरक्षा संस्थानों में रणनीतिक जिम्मेदारियां निभाने तक, उन्होंने कई अहम संस्थानों में सेवा दी।
जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष कार्य बल की स्थापना में उनका योगदान उनके पुलिस प्रमुख कार्यकाल की प्रमुख संस्थागत उपलब्धियों में शामिल है। बाद में यही बल राज्य की आतंकवाद-रोधी संरचना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना।
सभरवाल के निधन के साथ भारत की सुरक्षा व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे एक ऐसे अधिकारी का जीवन और सेवा समाप्त हो गई, जिन्होंने राष्ट्रीय और आंतरिक सुरक्षा की कठिन चुनौतियों के दौर में जिम्मेदारी निभाई। उनकी पेशेवर विरासत पुलिस सुधार, आतंकवाद-रोधी तैयारी और देश की व्यापक सुरक्षा संस्थाओं को मजबूत करने से जुड़ी रही।