नई दिल्ली, 28 जुलाई: सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने तीनों सेनाओं की पहली सर्व महिला परिक्रमा नौकायन अभियान ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ की महिला अधिकारियों से मुलाकात की। यह भेंट 22 जुलाई 2026 को भारत लौटने के बाद हुई और इस दौरान नौ अधिकारियों की असाधारण उपलब्धि को सम्मान दिया गया।
समुद्र प्रदक्षिणा को भारत के सैन्य इतिहास की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया है। 314 दिनों की इस यात्रा में पूरी महिला दल ने लगभग 25,500 समुद्री मील की दूरी तय की और चार प्रमुख महासागरों को पार किया। अभियान के दौरान उन्हें दुनिया की कुछ सबसे कठिन समुद्री परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
सेना प्रमुख ने अधिकारियों को उनकी ऐतिहासिक सफलता पर बधाई दी और पूरे अभियान के दौरान उनके संकल्प, अनुशासन तथा अटूट प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने इस उपलब्धि को साहसिक गतिविधियों, नेतृत्व और परिचालन उत्कृष्टता के लिए एक नया मानक बताया।
इस अभियान में भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना की महिला अधिकारियों ने हिस्सा लिया। यह भारत का पहला तीनों सेनाओं का सर्व महिला परिक्रमा अभियान रहा। यात्रा के दौरान अधिकारियों को अनिश्चित मौसम, उग्र समुद्र और लंबे समय तक अलग-थलग रहने जैसी परिस्थितियों से गुजरना पड़ा।
इन चुनौतियों के बीच उन्हें उत्कृष्ट नौकायन कौशल, निर्णय लेने की क्षमता और समन्वय का प्रदर्शन करना पड़ा। यह अभियान इस बात का प्रमाण बना कि कठिन परिस्थितियों में भी तीनों सेवाओं की महिला अधिकारी एकजुट होकर लक्ष्य हासिल कर सकती हैं।
जनरल धीरज सेठ ने कहा कि यह अभियान साहस, सहनशक्ति, टीमवर्क और वर्दीधारी महिलाओं की अदम्य भावना का उदाहरण है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी उपलब्धियां न केवल सेवा में कार्यरत कर्मियों को, बल्कि भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होने की इच्छा रखने वाले युवाओं को भी प्रेरित करती हैं।
नौ महिला अधिकारियों ने विभिन्न जलवायु क्षेत्रों और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्रों से होकर हजारों समुद्री मील की यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की। उनकी उपलब्धि भारत की बढ़ती समुद्री क्षमता, तीनों सेनाओं के बीच सहयोग और महिला अधिकारियों पर जताए गए विश्वास को दर्शाती है।
समुद्र प्रदक्षिणा के भारतीय सशस्त्र बलों के इतिहास में दर्ज हो जाने के साथ यह अभियान भविष्य की पीढ़ियों को प्रेरित करने वाला माना जा रहा है। साथ ही, यह साहसिक नौकायन और संयुक्त सैन्य पहलों में भारत की उत्कृष्ट परंपरा को और मजबूत करता है।