सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने 27 अक्टूबर को उत्तराखंड के जोशीमठ स्थित आइबेक्स ब्रिगेड और अग्रिम क्षेत्रों का दौरा कर सैन्य तैयारियों की समीक्षा की। उत्तरी सीमाओं के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मध्य सेक्टर में उन्होंने युद्धक क्षमता, आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल का जायजा लिया।
चीन से लगी संवेदनशील सीमा वाले गढ़वाल क्षेत्र में सैन्य कमांडरों ने उन्हें ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में तैनात सैनिकों की तैयारियों की जानकारी दी। साथ ही, क्षमता बढ़ाने के लिए चल रही पहलों और सेना की युद्धक प्रभावशीलता मजबूत करने के उपायों से अवगत कराया।
जनरल सेठ ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बदलती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सैन्य अभियानों में आधुनिक तकनीक अपनाने, निगरानी क्षमता बढ़ाने और लगातार सतर्कता बनाए रखने पर जोर दिया। अग्रिम क्षेत्रों में सैनिकों से बातचीत के दौरान उन्होंने कठिन मौसम और दुर्गम पहाड़ी परिस्थितियों के बावजूद देश की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा में जुटे सभी रैंकों के पेशेवर रवैये और समर्पण की सराहना की।

सेना प्रमुख ने सैनिकों को सेना के पांच सूत्रीय ‘विजय’ ढांचे को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। इसका उद्देश्य ऐसी चुस्त, तकनीकी रूप से उन्नत और भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार सेना विकसित करना है, जो हर तरह के सैन्य अभियान में तेजी से प्रतिक्रिया दे सके।
‘विजय’ के पांच प्रमुख बिंदु हैं—सतर्कता, नवाचार, संयुक्तता और एकीकरण, आत्मनिर्भरता तथा ‘योद्धा प्रथम’। इनमें बेहतर सैन्य तैयारी, स्वदेशी क्षमताओं और सैनिकों के कल्याण को प्राथमिकता दी गई है।

जनरल सेठ ने आपदाओं के प्रति संवेदनशील हिमालयी क्षेत्रों में सशस्त्र बलों और नागरिक प्रशासन के बीच समन्वय मजबूत करने की जरूरत भी बताई। उन्होंने मानवीय सहायता और आपदा राहत की पहले से योजना बनाने पर जोर दिया। इसके लिए संयुक्त अभ्यास, तैयारी परखने वाली ड्रिल और नागरिक एजेंसियों के साथ करीबी सहयोग को जरूरी बताया, ताकि आपात स्थिति में प्रभावी कार्रवाई हो सके।
दौरे के दौरान सेना प्रमुख चमोली जिले में भारत-चीन सीमा के पास स्थित माणा गांव भी पहुंचे, जिसे भारत के प्रथम गांव के रूप में जाना जाता है। उन्होंने स्थानीय लोगों से बातचीत की और सीमावर्ती समुदायों को सशक्त बनाने, पर्यटन को बढ़ावा देने, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा आजीविका के टिकाऊ अवसर तैयार करने से जुड़ी पहलों की समीक्षा की।
यह दौरा ऐसे समय हुआ है, जब सेना उत्तरी सीमाओं पर बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण, युद्धक तैयारियों, निगरानी और संपर्क सुविधाओं को बेहतर बनाने के प्रयास कर रही है। जनरल सेठ ने ‘मिशन के लिए तैयार, भविष्य पर केंद्रित’ रहने का संदेश देते हुए तैयारी, नवाचार और समन्वय पर बल दिया।
भारत-चीन सीमा का मध्य सेक्टर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में फैला है। दुर्गम पहाड़ी भूभाग, ऊंचाई वाले दर्रों और एलएसी से निकटता के कारण यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।