नई दिल्ली, 27 अक्टूबर 2026 (एएनआई): भारतीय सेना और वायुसेना अपने पुराने चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों की जगह लेने के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से करीब 200 स्वदेशी लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (LUH) खरीदने की तैयारी कर रही हैं। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, HAL अब तक 12 LUH बना चुका है और 187 अतिरिक्त हेलीकॉप्टरों के ऑर्डर की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इन्हें मिलाकर कुल संख्या 199 होगी। इस परियोजना की अनुमानित लागत 20,000 करोड़ रुपये से अधिक है।
दोनों सेनाओं को कुल करीब 400 हल्के हेलीकॉप्टरों की जरूरत है। इसी आवश्यकता के दूसरे हिस्से के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 26 अक्टूबर को 200 लाइट मल्टीरोल हेलीकॉप्टरों (LMRH) की खरीद को आवश्यकता की स्वीकृति दी। इनकी अनुमानित लागत करीब 20,000 करोड़ रुपये है। यह HAL के LUH की प्रस्तावित खरीद से अलग प्रक्रिया है।
LMRH के लिए भारतीय सेना के निविदा जारी करने की उम्मीद है। इसके तहत भारतीय कंपनियां विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं के साथ मिलकर देश में हेलीकॉप्टर बनाएंगी। संभावित दावेदारों में एयरबस के साथ साझेदारी करने वाली टाटा और इटली की लियोनार्डो के साथ साझेदारी वाला अदाणी समूह शामिल हैं। अमेरिका की बेल हेलीकॉप्टर्स के भी प्रतिस्पर्धा में उतरने की संभावना है।
यह ठेका सबसे कम बोली लगाने वाले L1 और दूसरे सबसे कम बोली लगाने वाले L2 बोलीदाता के बीच बांटे जाने की संभावना है। रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 120 LMRH सेना और 80 वायुसेना के लिए रखे गए हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, इस खरीद योजना के तहत सेना और वायुसेना के बेड़े में तीन अलग-अलग प्रकार के हल्के हेलीकॉप्टर होने की उम्मीद है। करीब आधे हेलीकॉप्टर निजी क्षेत्र से और बाकी HAL जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के निर्माताओं से लिए जाएंगे। दोनों माध्यमों से खरीद कर आने वाले वर्षों में लगभग 400 पुराने चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों को सेवा से हटाने की लंबे समय से लंबित जरूरत पूरी की जानी है।
HAL का LUH नई पीढ़ी का तीन टन श्रेणी का हेलीकॉप्टर है, जिसे खास तौर पर चीता और चेतक की जगह लेने के लिए विकसित किया गया है। इसमें मल्टी-फंक्शन डिस्प्ले वाला ग्लास कॉकपिट और एक आर्डिडेन-1यू टर्बोशाफ्ट इंजन लगा है। यह इंजन अधिक ऊंचाई वाले कठिन अभियानों के लिए जरूरी अतिरिक्त शक्ति उपलब्ध कराता है।
HAL के अनुसार, LUH को लगभग 220 से 235 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार और 6.5 किलोमीटर की अधिकतम परिचालन ऊंचाई के लिए डिजाइन किया गया है। यह 500 किलोग्राम भार के साथ 350 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है। इसका अधिकतम उड़ान भरने का वजन 3,150 किलोग्राम है और इसमें दो सदस्यीय चालक दल के अलावा अधिकतम छह यात्री बैठ सकते हैं।
इस हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल टोही और निगरानी, रसद पहुंचाने, सैनिकों की आवाजाही, घायलों को निकालने और प्रशिक्षण में किया जाना है। इसे मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों के लिए भी तैयार किया गया है। खास तौर पर सियाचिन से पूर्वोत्तर तक ऊंचाई वाले इलाकों में इसकी भूमिका होगी।
LUH के व्यापक परीक्षण हो चुके हैं, जिनमें अधिक ऊंचाई पर किए गए परीक्षण भी शामिल हैं। इसकी प्रमाणन प्रक्रिया अंतिम चरण में है। HAL का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027–28 में सीमित श्रृंखला उत्पादन के शुरुआती 12 हेलीकॉप्टर सौंपना है। इनमें छह सेना और छह वायुसेना को मिलेंगे। इनका उत्पादन कर्नाटक के तुमकुरु स्थित HAL के समर्पित संयंत्र में किया जा रहा है।
चीता और चेतक बेड़े को बदलने की पिछली कोशिशें पूरी नहीं हो सकी थीं। इनमें 2014 में रूसी का-226टी का चयन और उससे पहले की निविदाएं भी शामिल थीं। इसके चलते सीमावर्ती क्षेत्रों के महत्वपूर्ण अभियानों के लिए दोनों सेनाएं इन पुराने हेलीकॉप्टरों पर निर्भर बनी रहीं।
प्रस्तावित खरीद से उत्तरी और पूर्वोत्तर सीमाओं पर परिचालन क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत इससे देश के हेलीकॉप्टर निर्माण क्षेत्र और उससे जुड़े छोटे व मध्यम उद्योगों को भी काम मिलने की संभावना है। भारतीय नौसेना अलग से खोज एवं बचाव तथा अन्य भूमिकाओं के लिए हल्के समुद्री हेलीकॉप्टर खरीद रही है।