कर्नाटक के मंगलुरु निवासी फ्लाइट लेफ्टिनेंट प्रज्वल आर. शेट्टी भारतीय वायुसेना के अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमान राफेल के ऑपरेशनल पायलट बन गए हैं। उन्होंने 25 अक्टूबर 2026 को वाराणसी के नमो घाट पर गंगा नदी के ऊपर आयोजित ‘विंग्स ओवर गैंजेस’ हवाई प्रदर्शन में राफेल उड़ाया। यह आयोजन वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के समारोहों का हिस्सा था।
दक्षिण कन्नड़ जिले से आने वाले शेट्टी ने प्री-यूनिवर्सिटी कोर्स (पीयूसी) पूरा करने के बाद राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रवेश के लिए यूपीएससी की परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 42वीं रैंक हासिल की थी। पुणे स्थित एनडीए में तीन साल के प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने सुपर डिमोना विमान पर उड़ान का प्रशिक्षण लिया।
इसके बाद उन्होंने हैदराबाद की वायुसेना अकादमी में एक साल का उड़ान प्रशिक्षण पूरा किया। यहां उन्होंने पिलाटस और किरण विमान उड़ाए, विमानन संबंधी विषयों में पहला स्थान हासिल किया और बीटेक की डिग्री प्राप्त की। दिसंबर 2022 में उन्हें भारतीय वायुसेना की लड़ाकू विमान शाखा में कमीशन मिला।
शेट्टी ने पश्चिम बंगाल के वायुसेना स्टेशन कलाईकुंडा में हॉक एमके 132 विमान पर एक साल का बेसिक फाइटर कन्वर्जन प्रशिक्षण भी पूरा किया। इस चरण में भी वह विमानन संबंधी विषयों में शीर्ष पर रहे।
‘विंग्स ओवर गैंजेस’ में शेट्टी तीन राफेल विमानों की ‘नीलकंठ’ फॉर्मेशन का हिस्सा थे। उन्होंने फॉर्मेशन में बीच की अग्रणी स्थिति में विमान उड़ाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अन्य गणमान्य लोगों की मौजूदगी में हुए इस प्रदर्शन में कई प्रकार के विमानों और फॉर्मेशन ने भाग लिया।
भारतीय वायुसेना में राफेल का संचालन मुख्य रूप से अंबाला स्थित नंबर 17 स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज’ और हासीमारा स्थित नंबर 101 स्क्वाड्रन करती हैं। अंबाला की स्क्वाड्रन वायुसेना की पहली राफेल इकाई है। राफेल पर ऑपरेशनल दर्जा हासिल करने के लिए पायलट को कन्वर्जन प्रशिक्षण और एकल उड़ान की योग्यता पूरी करने के साथ स्क्वाड्रन की उड़ानों तथा मिशन संबंधी प्रक्रियाओं में दक्ष होना होता है।