भारतीय तट रक्षक जहाज सावित्रीबाई फुले को 19 सितंबर 2026 को कर्नाटक के कारवार में एक गरिमामय समारोह के दौरान सेवा से हटाया गया। इसके साथ ही इस जहाज की राष्ट्रसेवा का एक महत्वपूर्ण अध्याय पूरा हो गया।
सेवा से हटाने के समारोह के साथ भारतीय तट रक्षक में इसके परिचालन सफर का अंत हुआ। इस अवसर ने भारत के समुद्री जलक्षेत्र की सुरक्षा में इसके योगदान को याद करने का भी मौका दिया।
वर्षों के दौरान आईसीजीएस सावित्रीबाई फुले भारत की तटीय सुरक्षा व्यवस्था का एक अहम हिस्सा रही। निरंतर परिचालन तैनाती और पेशेवर प्रदर्शन के जरिए इसने समुद्री सतर्कता को मजबूत करने में योगदान दिया।
जहाज की सेवा भारतीय तट रक्षक की उस व्यापक जिम्मेदारी को भी दर्शाती है, जिसके तहत देश के समुद्री क्षेत्र में सतर्कता बनाए रखी जाती है। अपने परिचालन दायित्वों के माध्यम से इसने भारत के तटीय और समुद्री हितों की निगरानी और सुरक्षा में भूमिका निभाई।
तट रक्षक ने इस जहाज को शक्ति की विरासत के रूप में वर्णित करते हुए कहा कि इसने तटीय सतर्कता को मजबूत करने और अपने सेवा वर्षों के दौरान परिचालन उत्कृष्टता का रिकॉर्ड कायम रखने में योगदान दिया।
सेवा से हटाने का समारोह उस जहाज से जुड़े कर्मियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण अध्याय का समापन था। तट रक्षक कर्मियों के लिए किसी जहाज पर सेवा का अर्थ निरंतर परिचालन जिम्मेदारियां, टीम भावना और समुद्री सुरक्षा के प्रति समर्पण होता है।
यह अवसर न केवल जहाज की सेवा का औपचारिक समापन था, बल्कि उन अधिकारियों और कर्मियों के सामूहिक प्रयासों को भी सम्मान देने का क्षण था, जिन्होंने इसके परिचालन काल में इसे चलाया और बनाए रखा।
भारतीय तट रक्षक की भूमिका भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने और देश के विस्तृत तट तथा समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षा और सतर्कता बनाए रखने में केंद्रीय है। इस सेवा द्वारा संचालित जहाज और अन्य मंच समुद्री सुरक्षा ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
आईसीजीएस सावित्रीबाई फुले का परिचालन काल तटीय सतर्कता और समुद्री अभियानों में उसकी भूमिका के जरिए इसी व्यापक मिशन में योगदान देता रहा। इसकी सेवा ने भारत के समुद्री जलक्षेत्र में तट रक्षक की सशक्त और त्वरित उपस्थिति बनाए रखने के निरंतर प्रयासों को दर्शाया।
कारवार में हुआ यह गरिमामय समारोह एक अंत के साथ-साथ स्मरण का क्षण भी बना, जिसमें जहाज के योगदान और उसके संचालन से जुड़े कर्मियों की सेवा को सम्मान दिया गया।
19 सितंबर को सेवा से हटाए जाने के साथ सावित्रीबाई फुले ने भारतीय तट रक्षक के साथ अपना अध्याय औपचारिक रूप से पूरा कर लिया। सेवा की श्रद्धांजलि में इसके असाधारण शक्ति-सम्पन्न विरासत, परिचालन उत्कृष्टता और भारत की समुद्री सुरक्षा में योगदान को रेखांकित किया गया।
जहाज की सेवानिवृत्ति ने उसकी यात्रा का समापन किया, लेकिन इसकी विरासत उन तट रक्षक कर्मियों से जुड़ी रही जो उस पर सेवा दे चुके थे और उन समुद्री सतर्कता अभियानों से भी, जिन्हें इसने राष्ट्र की सेवा में पूरा किया।