भारतीय सेना की तोपखाना रेजिमेंट ने पश्चिमी कमान, चंडीमंदिर में 4th Gen SF Rodrigues Memorial Seminar 2026 का आयोजन किया। इस संगोष्ठी में नेटवर्क आधारित सटीक प्रहार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मानव रहित प्रणालियों और लंबी दूरी की क्षमताओं की बढ़ती भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया, जो भविष्य की तोपखाना युद्धकला को आकार दे रही हैं।
“Asymmetric Capability through Networked Precision Fires by Artillery” विषय पर आयोजित यह संगोष्ठी Centre for Land Warfare Studies (CLAWS) के सहयोग से हुई। इसमें वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व, पूर्व सैनिक, शिक्षाविद, रक्षा उद्योग प्रतिनिधि और क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हुए, जिन्होंने उभरती प्रौद्योगिकियों, समकालीन युद्धक्षेत्र की चुनौतियों और हालिया संघर्षों से मिले अनुभवों पर चर्चा की।
कार्यक्रम में विशेषज्ञ प्रस्तुतियां, पेशेवर विचार-विमर्श और तोपखाने तथा मल्टी-डोमेन ऑपरेशनों से जुड़ी नवाचारी प्रौद्योगिकियों एवं समकालीन समाधानों का प्रदर्शन भी किया गया।
चर्चाओं में असममित युद्ध के वैश्विक रुझानों और नेटवर्क आधारित सटीक प्रहार, लंबी दूरी की मुठभेड़ों, स्वचालन तथा तेज युद्धक्षेत्रीय निर्णय-प्रक्रिया के बढ़ते महत्व की समीक्षा की गई। इसमें तोपखाना, मानव रहित हवाई प्रणालियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, निगरानी मंचों और सटीक निर्देशित गोला-बारूद के बीच बढ़ते समन्वय पर विशेष जोर दिया गया।
प्रतिभागियों ने इस बात पर चर्चा की कि युद्धक्षेत्रीय सेंसर, हथियार प्रणालियों और निर्णय-निर्माताओं को बिना किसी रुकावट के जोड़ना कितना आवश्यक है, ताकि लक्ष्यों की पहचान, आकलन और उन पर तेजी से तथा सटीक प्रहार किया जा सके। आधुनिक तोपखाना अभियानों में यह नेटवर्किंग इसलिए और महत्वपूर्ण होती जा रही है, क्योंकि निगरानी साधनों और मानव रहित मंचों से मिली जानकारी को लंबी दूरी की हथियार प्रणालियों के साथ जोड़कर सेंसर से प्रहार तक की प्रक्रिया को तेज किया जा सकता है।
संगोष्ठी में समकालीन संघर्षों से उभर रहे अनुभवों पर भी विचार किया गया, विशेष रूप से ड्रोन, निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और सटीक प्रहार क्षमताओं के बीच तेजी से बदलते संबंध पर। विचार-विमर्श में यह रेखांकित किया गया कि तकनीकी विकास किस तरह पारंपरिक तोपखाना संचालन को बदल रहा है और अधिक दूरी तक निरंतर निगरानी, स्वचालन, लचीले संचार और सटीक प्रहार की आवश्यकता को बढ़ा रहा है।
पश्चिमी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह, एवीएसएम, एसएम एंड बार ने समापन संबोधन में तोपखाने के निरंतर रूपांतरण को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इसकी मारक दूरी, सटीकता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालन, निरंतर निगरानी और युद्धक्षेत्रीय नेटवर्किंग में सुधार से यह बदलाव तेज हुआ है।
उन्होंने बल दिया कि उभरती युद्धक्षेत्रीय जरूरतों के साथ-साथ सिद्धांतों, प्रौद्योगिकियों, संगठनात्मक ढांचों और प्रशिक्षण पद्धतियों को भी निरंतर विकसित होना चाहिए, ताकि युद्धक्षेत्र की पूरी गहराई में निर्णायक बढ़त बनाए रखी जा सके।
यह संगोष्ठी भारतीय सेना की प्रौद्योगिकी आत्मसात करने, नवाचार और क्षमता विकास पर व्यापक जोर को भी दर्शाती है, क्योंकि युद्ध अब अधिकाधिक नेटवर्क आधारित और बहु-क्षेत्रीय होता जा रहा है।
सेंसर, प्रहारक साधनों और निर्णय-निर्माताओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता-समर्थित प्रणालियों, निगरानी मंचों, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं और सटीक हथियारों के साथ जोड़कर सेना एक अधिक जुड़ी हुई, चुस्त और भविष्य के लिए तैयार बल विकसित करने की दिशा में काम कर रही है, जो बदलते युद्धक्षेत्र में अधिक दूर तक देख सके, तेज निर्णय ले सके और सटीक प्रहार कर सके।