भारतीय वायुसेना राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री समेत अति विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षित यात्रा के लिए 24 विशेष उपयोग वाले हेलीकॉप्टर खरीदने की योजना बना रही है। इस खरीद पर करीब 10,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में 26 अक्टूबर 2026 को हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में प्रस्ताव को आवश्यकता की स्वीकृति मिली। यह खरीद प्रक्रिया की शुरुआती मंजूरी है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन हेलीकॉप्टरों की खरीद से वायुसेना की महत्वपूर्ण हवाई परिवहन जरूरतें पूरी करने में मदद मिलेगी। नए हेलीकॉप्टर रूस निर्मित एमआई-17 वी5 की जगह लेंगे, जिन्हें फिलहाल वीवीआईपी परिवहन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। पिछला वीवीआईपी हेलीकॉप्टर कार्यक्रम भ्रष्टाचार विवाद के बाद रद्द होने पर एमआई-17 वी5 में इस भूमिका के लिए बदलाव किए गए थे।
अधिकारियों के मुताबिक, इस खरीद के प्रमुख दावेदारों में एयरबस एच-725 और अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन का एक हेलीकॉप्टर शामिल है। लॉकहीड मार्टिन के मॉडल को व्यापक रूप से सिकोरस्की एस-92 बताया जा रहा है। तकनीकी जरूरतें वीवीआईपी परिवहन की परिचालन, सुरक्षा और आराम संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तय की गई हैं।
हेलीकॉप्टरों की संख्या सीमित होने के कारण इन्हें सीधे विदेशी आपूर्तिकर्ताओं से खरीदे जाने की उम्मीद है। इनमें जमीन से होने वाले खतरों से बचाव के लिए उन्नत रक्षात्मक प्रणालियां भी लगाई जाएंगी।
यह प्रस्ताव उसी दिन परिषद से मंजूर हुए करीब 2.12 लाख करोड़ रुपये के व्यापक पूंजीगत रक्षा खरीद प्रस्तावों का हिस्सा है। कुल खरीद का लगभग 82 प्रतिशत भारतीय उद्योग से किए जाने की उम्मीद है। वायुसेना के लिए अन्य मंजूरियों में वायु रक्षा प्रणालियां, हथियार और मोबाइल एक्स-बैंड डॉप्लर मौसम रडार प्रणालियां शामिल हैं। इन रडारों का उद्देश्य अग्रिम क्षेत्रों में स्थानीय मौसम की निगरानी बेहतर करना है।
थलसेना और नौसेना से जुड़े प्रस्तावों में हल्के बहुउद्देशीय हेलीकॉप्टर, ट्रैक पर चलने वाली स्वचालित तोप प्रणालियां, अधिक गतिशीलता वाले वाहन, ड्रोन-रोधी प्रणालियां, निगरानी और हमले में सक्षम मानवरहित विमान तथा नौसैनिक प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
इससे पहले 2010 में अगस्ता वेस्टलैंड के साथ 12 एडब्ल्यू-101 वीवीआईपी हेलीकॉप्टरों के लिए 3,500 करोड़ रुपये से अधिक का अनुबंध हुआ था। बिचौलियों और भारतीय अधिकारियों से जुड़े रिश्वतखोरी के आरोप सामने आने के बाद यह अनुबंध रद्द कर दिया गया। तब से वायुसेना देश के शीर्ष पदाधिकारियों की यात्रा के लिए संशोधित एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टरों पर निर्भर है।