पुणे क्राइम ब्रांच ने फर्जी कुराश प्रमाणपत्रों के जरिए खेल कोटे से नौकरी पाने के आरोप में नवनियुक्त 14 पुलिस कांस्टेबलों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में 19 नवनियुक्त कांस्टेबल आरोपी हैं, जिनमें से पांच फरार हैं। गिरफ्तारियां पिछले दो दिनों में महाराष्ट्र के अलग-अलग पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों से की गईं।
बड़े पैमाने पर फर्जी खेल प्रमाणपत्र जारी किए जाने की जानकारी मिलने के बाद 3 सितंबर 2026 को शिवाजीनगर पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि महाराष्ट्र स्टेट कुराश एसोसिएशन ने 2016 से 2023 के बीच प्रतियोगिताओं में भागीदारी और उपलब्धियों के करीब 1,200 से 1,500 फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कर जारी किए। इनका इस्तेमाल सरकारी भर्तियों में महाराष्ट्र के पांच प्रतिशत खेल कोटे का लाभ लेने के लिए किया गया। कुराश जैकेट पहनकर खड़े होकर लड़ी जाने वाली कुश्ती का एक प्राचीन रूप है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष अंकुश विट्ठल नागर और सचिव शिवाजी जयवंत सालुंखे को सितंबर की शुरुआत में गिरफ्तार किया गया था। आगे की जांच में सामने आया कि पुणे शहर पुलिस की हालिया भर्ती में 19 अभ्यर्थियों ने ऐसे प्रमाणपत्र जमा किए थे। इनमें से 14 को अब हिरासत में लिया गया है, जबकि पांच गिरफ्तारी से पहले फरार हो गए। मामले में अब तक करीब 24 से 25 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। इनमें एसोसिएशन के पदाधिकारी, जिला कुराश संघों से जुड़े एजेंट और प्रमाणपत्र दिलाने में कथित तौर पर मदद करने वाले अन्य लोग शामिल हैं।
पुलिस उपायुक्त (अपराध) गौहर हसन ने बताया कि गिरफ्तार कांस्टेबलों ने शुरुआत में अपने प्रमाणपत्र असली होने का दावा किया था। जांच में दस्तावेज फर्जी पाए गए और यह भी सामने आया कि उनमें दर्ज कई प्रतियोगिताएं हुई ही नहीं थीं। इसके बाद अलग-अलग प्रशिक्षण संस्थानों से उनकी गिरफ्तारी की गई।
हसन के मुताबिक, इन प्रमाणपत्रों को असली बताकर सत्यापित करने वाले सरकारी अधिकारियों की भूमिका भी जांची जा रही है। राज्यभर की पुलिस इकाइयों को पत्र भेजे गए हैं। अन्य सरकारी विभागों में भी इसी तरह की जांच की जाएगी, क्योंकि फर्जीवाड़ा पुलिस भर्ती से आगे तक फैला हो सकता है।
पहले की रिपोर्टों के अनुसार, 2023 से कुराश प्रमाणपत्रों के आधार पर पुलिस और राज्य के अन्य विभागों में भर्ती हुए 71 अभ्यर्थी जांच के दायरे में हैं। जांचकर्ता यह भी पता लगा रहे हैं कि महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के जरिए प्रथम और द्वितीय श्रेणी के पदों पर भर्ती के लिए राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर के फर्जी प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल हुआ था या नहीं।
पुलिस को दस्तावेजों में तारीखों के मेल न खाने जैसी गड़बड़ियां मिली हैं। कुछ पुराने प्रमाणपत्रों पर जिलों के ऐसे नाम लिखे हैं जो 2023 के बाद अपनाए गए थे। कुछ प्रमाणपत्रों में उन प्रतियोगिताओं का उल्लेख है जिनका आयोजन ही नहीं हुआ।
मामले ने खेल कोटे से भर्ती की विश्वसनीयता और वास्तविक खिलाड़ियों के अवसर छिनने की आशंका को लेकर सवाल खड़े किए हैं। गिरफ्तार आरोपियों में से कई को यरवदा सेंट्रल जेल भेजा गया है। फरार आरोपियों की तलाश और मामले की जांच जारी है।