पूर्वी लद्दाख में स्थानीय समुदायों के कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए भारतीय सेना ने पशुपालन विभाग के साथ मिलकर चांगथांग क्षेत्र के दूरस्थ गांव चुशुल और त्सागा में 27 जुलाई, 2026 को समन्वित पशु चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया।
इस पहल का उद्देश्य उन पशुधन को आवश्यक पशु चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा और निवारक उपचार उपलब्ध कराना था, जो इस ऊंचाई वाले क्षेत्र में कई परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार हैं। इन शिविरों में भेड़, बकरी और अन्य पालतू पशुओं की चिकित्सकीय जांच, रोग-निवारण उपाय और उपचार किया गया।
चांगथांग अपने कठिन भू-भाग और चरम जलवायु परिस्थितियों के लिए जाना जाता है। यहां के समुदाय अपनी जीविका और आय के लिए पशुपालन पर काफी हद तक निर्भर हैं। भेड़, बकरी, याक और प्रसिद्ध चांगथांगी बकरियां, जिनसे विश्वप्रसिद्ध पश्मीना ऊन प्राप्त होता है, क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाती हैं।
भारतीय सेना की पशु चिकित्सा टीमों ने पशुपालन विभाग के विशेषज्ञों के साथ मिलकर समन्वित स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कीं। इस सहयोग से पशुओं को समय पर चिकित्सा सहायता, टीकाकरण और निवारक देखभाल मिली, जिससे रोग फैलने का खतरा कम करने और समग्र पशु स्वास्थ्य सुधारने में मदद मिली।
पशु चिकित्सा सहायता देने के अलावा यह पहल भारतीय सेना, नागरिक प्रशासन और लद्दाख के लोगों के बीच मजबूत साझेदारी को भी दर्शाती है। ऐसे जनसंपर्क कार्यक्रम दूरस्थ सीमावर्ती समुदायों के साथ सेना के जुड़ाव का अहम हिस्सा बन चुके हैं।
ये कार्यक्रम सेना की उस भूमिका को भी रेखांकित करते हैं, जिसमें वह देश की सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय विकास और कल्याण में योगदान देती है। सेना लगातार उन क्षेत्रों में लोगों के साथ भरोसे का संबंध मजबूत करने का प्रयास कर रही है, जहां जीवन-यापन की चुनौतियां अधिक हैं।
चुशुल और त्सागा में आयोजित इन पशु चिकित्सा शिविरों की सफलतापूर्वक संपन्नता लद्दाख के लोगों, नागरिक प्रशासन और भारतीय सेना के बीच स्थायी संबंध का एक और उदाहरण है। समुदाय कल्याण और टिकाऊ आजीविका पर केंद्रित पहलों के जरिए सेना सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास में एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में अपनी भूमिका को और सुदृढ़ कर रही है।