हरियाणा के चरखी दादरी जिले के कसनी गांव निवासी भारतीय सेना के जवान रवि प्रकाश का बेंगलुरु में प्रमोशन कोर्स के दौरान शारीरिक प्रशिक्षण सत्र के समय हृदयाघात से निधन हो गया। उनके आठ वर्षीय पुत्र देव ने गुरुवार, 20 अगस्त को अंतिम संस्कार किया और चिता को अग्नि दी। गांव और आसपास के लोगों ने उन्हें पूरे सैन्य सम्मान के साथ भावभीनी विदाई दी।
रवि प्रकाश प्रमोशन कोर्स कर रहे थे, जिसका अंतिम दिन मंगलवार, 18 अगस्त था। सफलतापूर्वक कोर्स पूरा होने पर उनके हवलदार पद पर पदोन्नत होने की उम्मीद थी। उस सुबह प्रशिक्षण मैदान में अभ्यास या शारीरिक प्रशिक्षण सत्र के दौरान वे अचानक बीमार पड़ गए। साथी सैनिक उन्हें तुरंत अस्पताल ले गए, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। परिवार को बताया गया कि उनकी मृत्यु हृदय गति रुकने या हृदय विफलता के कारण हुई।
पृष्ठभूमि और सेवा
रवि प्रकाश 2015 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे और शुरुआत में उन्हें मद्रास इंजीनियर रेजिमेंट की एक इकाई में तैनात किया गया था। निधन के समय वे राष्ट्रीय राइफल्स की 54 बटालियन के साथ सेवा दे रहे थे और कश्मीर में तैनात थे। लगभग दो महीने पहले वे ड्यूटी पर घर से गए थे और बाद में उन्हें प्रमोशन कोर्स के लिए बेंगलुरु भेजा गया था।
उनके पिता श्री कृष्ण सांगवान, जो किसान हैं, ने बाद में बताया कि उनका बेटा मुक्केबाजी में पांच बार स्वर्ण पदक जीत चुका था। इससे उसकी शारीरिक क्षमता और अनुशासन का पता चलता था, जो उसकी सेवा की पहचान रहे।
परिवार से आखिरी बातचीत
निधन से एक रात पहले, सोमवार 17 अगस्त को रवि प्रकाश ने वीडियो कॉल पर अपनी पत्नी सुनीता और आठ वर्षीय बेटे देव से बात की थी। उन्होंने बताया था कि प्रशिक्षण लगभग पूरा हो चुका है और वे जल्द ही हवलदार बनकर घर लौटेंगे। वही बातचीत उनके परिवार के लिए उनका आखिरी संदेश बन गई।
पार्थिव शरीर गांव पहुंचा; भावुक विदाई
पार्थिव शरीर पहले पीजीआई रोहतक लाया गया और फिर गुरुवार सुबह 20 अगस्त को सेना के वाहन से कसनी गांव पहुंचाया गया। करीब 8 किलोमीटर दूर पड़ोसी गांव सनवाड़ में सैकड़ों ग्रामीण और युवा मोटरसाइकिलों के साथ जुटे। तिरंगे से सजी बाइकों के साथ वे वाहन के पीछे कसनी तक पहुंचे। स्कूल के बच्चे भी रास्ते में राष्ट्रीय ध्वज लिए खड़े रहे और उनके सम्मान में नारे लगाए।
अंतिम संस्कार स्थल पर छोटे देव ने अपने पिता की अंतिम क्रियाएं पूरी कीं और चिता को अग्नि दी। सेना के जवानों ने गोली चलाकर अंतिम सलामी दी। श्री कृष्ण सांगवान और सुनीता गमगीन थे, जबकि ग्रामीण उन्हें ढांढस बंधाते रहे। रवि प्रकाश की निजी वस्तुएं भी समारोह के दौरान परिवार को सौंपी गईं, जिन्हें उनके छोटे बेटे ने ग्रहण किया।
परिवार और गांव में शोक
रवि प्रकाश के परिवार में पत्नी सुनीता, पुत्र देव, पिता श्री कृष्ण सांगवान, माता नीलम, बड़े भाई दिनेश और विवाहित बड़ी बहन प्रीति हैं। अचानक हुई उनकी मृत्यु से कसनी गांव शोक में डूब गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण, युवा और स्कूली बच्चे श्रद्धांजलि देने पहुंचे और उनकी अंतिम यात्रा सेवा के प्रति आभार की सामूहिक अभिव्यक्ति बन गई।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जवान के निधन पर दुख व्यक्त किया और राष्ट्र के लिए उनकी सेवा तथा बलिदान को नमन किया।
पदोन्नति के करीब पहुंचे एक युवा सैनिक की अचानक मृत्यु ने उसके परिवार और कसनी के करीबी ग्रामीण समाज को गहरे सदमे में डाल दिया है। रवि प्रकाश की कहानी सैन्य प्रशिक्षण की शारीरिक चुनौतियों और सेवा करने वालों के परिवारों पर पड़ने वाले व्यक्तिगत बोझ को भी सामने लाती है। अपने आठ वर्षीय बेटे द्वारा चिता को अग्नि देना विदाई के सबसे मार्मिक दृश्यों में से एक बन गया।