कोच्चि में 25 जुलाई 2026 को भारतीय नौसेना के विमानन कर्मियों के प्रशिक्षण में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज हुई, जब नौसेना वायु संचालन विद्यालय में 103वें नौसेना वायु संचालन पाठ्यक्रम की औपचारिक दीक्षांत परेड आयोजित की गई।
इस समारोह में भारतीय नौसेना के चार अधिकारियों और भारतीय तटरक्षक बल के एक अधिकारी ने यह विशेष पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा किया। इसके बाद उन्हें वायु संचालन अधिकारी के रूप में कमीशन प्रदान किया गया। यह अधिकारी नौसैनिक विमानन अभियानों की योजना, समन्वय और संचालन प्रबंधन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालते हैं।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘विंग्स’ का प्रदान किया जाना रहा, जो इस कठिन पाठ्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करने और नौसेना वायु संचालन में जिम्मेदारी निभाने की तत्परता का प्रतीक है। यह विंग्स दक्षिणी नौसेना कमान के प्रशिक्षण कमोडोर, कमोडोर पी.जी. थॉमस ने अधिकारियों की उपलब्धि के सम्मान में प्रदान किए।
नौसेना वायु संचालन पाठ्यक्रम अधिकारियों को नौसैनिक विमानों और हेलीकॉप्टरों से जुड़े जटिल वायु अभियानों के प्रबंधन के लिए आवश्यक विशेष ज्ञान और व्यावहारिक कौशल प्रदान करता है। वायु संचालन अधिकारी मिशन योजना, हवाई क्षेत्र प्रबंधन, उड़ान समन्वय, निगरानी, खोज और बचाव अभियानों तथा विमानन संसाधनों और समुद्री बलों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
भारतीय तटरक्षक बल के एक अधिकारी की भागीदारी संयुक्त प्रशिक्षण और अंतर-संचालनीयता पर बढ़ते जोर को भी दर्शाती है। ऐसे सहयोगी प्रशिक्षण से समुद्री निगरानी, मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों, खोज और बचाव कार्यों तथा तटीय सुरक्षा कार्यों में बेहतर समन्वय मिलता है।
कमोडोर पी.जी. थॉमस ने स्नातक अधिकारियों को बधाई देते हुए उनके समर्पण, व्यावसायिकता और कठिन प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान उनकी दृढ़ता की सराहना की। उन्होंने अधिकारियों को उच्चतम परिचालन मानकों को बनाए रखने और भारत की समुद्री विमानन क्षमताओं को मजबूत करने में योगदान जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया।
103वें नौसेना वायु संचालन पाठ्यक्रम का सफल समापन इस बात को रेखांकित करता है कि भारतीय नौसेना अपने बढ़ते परिचालन दायित्वों के अनुरूप अत्यधिक कुशल विमानन पेशेवर तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह प्रशिक्षण हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना की जिम्मेदारियों को समर्थन देने के साथ भारतीय तटरक्षक बल के साथ संयुक्त समुद्री सुरक्षा को भी सुदृढ़ करता है।